एक ऐसी उम्र जिसमे हर व्यक्ति सारे काम छोड़ देता है व अपने जीवन की हर जिम्मेदारी से अपने आपको विमुख रखता है क्योकि हर व्यक्ति इस उम्र में अशक्त हो जाता है वह किसी काम को करने की चाह को अपने दिल में नही रखता है ऐसी ही उम्र की दहलीज पर 102 वर्ष की एक वृद्ध महिला ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और उन्होंने ना ही सिर्फ केवल चुनाव जीता बल्कि अपने गाँव को एक आदर्श गाँव की तरह प्रतिष्ठित करने का संकल्प लिया.
कर्णाटक के चामराजनगर जिले के कोलेगाह तालुक में स्थित दोड्डहलसुरु गांव की गौतम्मा देवी ने ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा और चुनाव में सफलता हासिल की. चुनाव में उनकी जीत से सभी आश्चर्यचकित हो गये थे क्योकि गौतम्मा ने पहली बार चुनाव लड़ा था. गौतम्मा का चर्चित उपनाम दोड्डम्मा था. जब बात गौतम्मा के पति की कि जाये तो वे 30 सालो तक लगातार गाँव के मुखिया के रूप में प्रतिष्ठित रहे थे. उनके पति का सपना था की उनका आदर्श गाँव हो. और गौतम्मा का कहना है की वे अपने पति के सपने को पूरा करना चाहती है.
जब 102 साल की गौतम्मा ने चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया तो कई लोगो ने उन्हें ताने दिए और उनका मजाक बनाया. गौतम्मा ने चुनाव प्रचार का कार्य भी किया वे वोट मांगने घर घर गई. गौतम्मा ने इस चुनाव को 160 वोटो से जीता था. गौतम्मा ने सबसे ज्यादा उम्र में चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया. गौतम्मा को एक बेटा और 6 बेटिया और 20 नाती-पोते है. उनके पति का कई सालो पहले ही निधन हो गया था. गौतम्मा ने इस उम्र में चुनाव लड़कर एक सशक्त नारी की पहचान दी है.
वे लोग जो अक्सर उम्र का बहाना बना कर घर में बैठ जाते है उन सभी के लिए दोड्डम्मा एक जीती जगती मिसाल के रूप में है.
http://dilsedeshi.com/wp-content/uploads/2016/10/102-year-old-lady-won-panchayat-1024x616.jpghttp://dilsedeshi.com/wp-content/uploads/2016/10/102-year-old-lady-won-panchayat-150x150.jpgManoj Kagताज़ा अपडेटएक ऐसी उम्र जिसमे हर व्यक्ति सारे काम छोड़ देता है व अपने जीवन की हर जिम्मेदारी से अपने आपको विमुख रखता है क्योकि हर व्यक्ति इस उम्र में अशक्त हो जाता है वह किसी काम को करने की चाह को अपने दिल में नही रखता है ऐसी ही...राष्ट्र सर्वोपरि