ये भारत भूमि जिस पर हम पैदा हुए, ये कभी सोने कि चिड़िया थी. पर कुछ विदेशी आक्रांताओं ने इसका धन वैभव लुट कर, इसकी संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया. कई बलिदानियों के बलिदान के बाद हमे आजादी तो मील गयी पर लूली लंगडी. इस देश के युवा इस माटी को कमतर समझने लगे है. अपनी संस्कृति उन्हें एक अंधविश्वास लगती है.
दिल से देशी(Dil Se Deshi) वेबसाइट को प्रारम्भ करने का यही उद्देश है कि वो जाने कि हम क्या थे. हमने विश्व को क्या दिया. हमे विश्व गुरु क्यों कहा गया. और हम अब क्या कर सकते है. अपने उस स्थान को पाने के लिए जो सदियों से हमारा था.
अब हमें वो बनना है कि कोई इस देश कि और आँख उठा कर न देख सके और ऐसी हिमाकत करने वाला अपना भविष्य ही न देख सके …

“पहले हम सोने कि चिड़िया थे, अब हमें सोने का शेर बनना है”
||वंदे मातरम||