आप सभी महाभारत के बारे में व्यापक जानकारी रखते होंगे. जब महाभारत युद्ध के अंत के बाद जब पांडव युद्ध जीत गए, और युधिष्ठिर राजा बन गए, तब पांडव कुरुक्षेत्र में तीरों की शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह से राजनीति की शिक्षा लेने पहुंचे. पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को जितनी भी बातें बताईं वे आज भी हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है. उस समय भीष्म ने अनेक विषयों पर पांडवो को शिक्षा दी थी. भीष्म ने बताया की इंसान को किस प्रकार के लोगों से रिश्ते बनाने चाहिए और किस प्रकार के लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए, इसे लेकर भी भीष्म ने युधिष्ठिर को अद्भुत ज्ञान दिया था.

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आइए,जानते हैं कि भीष्म ने युधिष्ठिर को किन लोगों से हमेशा दूर रहने और दोस्ती ना करने का उपदेश दिया था

1. जलन या द्वेष रखने वाला

ऐसे मनुष्य जो दूसरों के प्रति अपने मन में जलन या द्वेष की भावना रखते है, वह निश्चित ही छल-कपट करने वाला, पापी, धोखा देने वाला होता है. ऐसा व्यक्ति जो दुसरो के प्रति द्वेष की भावना रखता था वह उनको नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. जलन और द्वेष भावना रखने वाले के लिए सही-गलत के कोई पैमाने नहीं होते हैं. अर्थात वे व्यक्ति सही-गलत का नही सोच सकते है. ऐसे व्यक्ति की दोस्ती और संगत हमें भी उसी की तरह दुराचारी और दुष्ट बना देती है.

2. नास्तिक

जो भगवान और धर्म में आस्था नहीं रखते हम उन्हें आस्तिक कहते है. ऐसे व्यक्ति धर्म में आस्था नही रखते है उनके पापा और पुण्य का कोई महत्व नही होता है वह केवल अपने लिए अच्छा सोचता है किसी और का अनिष्ट होने से उन्हें कोई फर्क नही पड़ता है. नास्तिक को धर्म-ज्ञान और ईश्वर भक्ति से कोई मतलब होता है. नास्तिक व्यक्ति धर्म और शास्त्रों में विश्वास ना होने की वजह से अधर्मी और पापी होता है. झूठ बोलना, बुरा व्यवहार करना आदि उसका स्वभाव बन जाता है. वह खुद का जीवन तो नरक के समान बनाता ही है, साथ ही उससे संबंध रखने वालों का व्यवहार भी अपने समान कर देता है. ऐसे मनुष्य की संगति से सदैव दूरी बनाए रखनी चाहिए. अतः नास्तिक से मित्रता नही करना चाहिए.

3. आलसी

आलस्य हर किसी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है. आलसी व्यक्ति अपने अपने आलस्य के कारण जीवन में किसी भी अवसर का लाभ नहीं लेता. वह अपनी जिम्मेदारियों को समय पर पूरी नही कर पाता है जिसके कारण वह सबकी नजरों में बुराई का पात्र बनता जाता है. ना तो वह अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहता है, ना आपने कामों के प्रति. उसकी संगति से हम भी आलसी होने लगते हैं. इसी कारण से आलसी मनुष्य से कभी दोस्ती नहीं करनी चाहिए.

4. क्रोध करने वाला

शास्त्रों में अत्यधिक या बेवजह क्रोध करने वाले व्यक्ति का व्यवहार दानव के समान माना जाता है. क्रोध करने वाला व्यक्ति क्रोध में हमेशा अपना ही नुकसान करता है. और कई बारक्रोध के कारण निन्दा और हास्य का पात्र भी बन जाता है. क्रोधी व्यक्ति से दोस्ती करने पर ना केवल खुद को बल्कि अपने परिजनों को भी हानि पहुंच सकती है. अतः क्रोध करने वालों से कभी मित्रता नहीं करनी चाहिए.

5. शराब पीने वाला

शराब और शराब पीने वाले व्यक्ति का हमारे समाज में कोई सम्मान नही होता है. और सामाजिक जीवन में सभी के लिए कुछ सीमाएं होती है. हर व्यक्ति को उन सीमाओं का पालन हमेशा करना चाहिए, और हम जानते है की बहुत से व्यक्ति उन सीमओं का पालन करते भी है लेकिन शराब पीने वाले मनुष्य के लिए कोई सीमा नहीं होती. शराब पीने के बाद उसे अच्छे-बुरे किसी का भी होश नहीं रहता है. ऐसा व्यक्ति कभी भी अपने परिवार और मित्रों के लिए नुकसान देने वाला हो सकता है. वह किसी भी समय आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. अतः कभी भी शराब पीने वाले से दोस्ती नही करना चाहिए.

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