ATM मशीन जो आज के आधुनिक युग के लिए बहुत ही आवश्यक है इससे समय कि बचत तो होती ही है और साथ ही बैंक में घंटो खड़े भी नही रहना पड़ता है. ATM का इतिहास बहुत ही पुराना है. 2 सितम्बर 1969 को लगभग 47 साल पहले ATM सार्वजानिक रूप से जनता के उपयोग के लिए लगाया गया था. सर्वप्रथम यह सेवा केमिकल बैंक इन रॉकविल सेण्टर, न्यूयॉर्क ने शुरू की थी. आज 21वीं सदी में ATM प्रत्येक देश में पहुँच गया है. आज ATM इतनी अधिक संख्या में लग चुके है की प्रत्येक किलोमीटर पर एक ATM मिल जाता है. ATM आज सभी के लिए उपयोगी है.

ATM बनने की वजह- ATM को बनाने का श्रेय स्कॉटलैंड के जॉन शेफर्ड बैरन को जाता है उन्होंने ही ATM को बनाया था. बात 1965 की है जब एक दिन जॉन शेफर्ड को बैंक से पैसे निकालने थे पर किसी कारणवश उन्हें देरी हो गई और बैंक बंद हो गया. और फिर उन्होंने एक ऐसी मशीन की कल्पना की जिसके द्वारा कभी भी-किसी भी समय पैसे निकाले जा सकते हो. और इस प्रकार ATM का अविष्कार हुआ.

FIRST ATM- पहला ATM लन्दन के बारक्लेज बैंक में 27 जून, 1967 को लगाया गया था. ATM को Automated Teller Machine कहते हैं.

ATM PIN – ATM के पिन नंबर में 4 डिजिट होते है, बैरन की ATM का पिन 6 डिजिट में रखने की इच्छा थी, परन्तु उनकी पत्नी कारोलीन को 6 डिजिट याद नहीं होते थे. इस कारण पिन 4 डिजिट का तय किया गया.

FIRST ATM IN INDIA – भारत में पहली बार ATM सेवा 1987 में हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (HSBC) द्वारा शुरू की गई थी. पहली ATM मशीन मुंबई में लगाई थी.

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