करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान पर अनुच्छेद | Article on Karat-Karat Abhyas in Hindi

करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान पर अनुच्छेद | Article on Karat-Karat Abhyas Ke Jadmati Hot Sujaan Doha in Hindi

हम अनुच्छेद को कवियों के दोहे के ऊपर भी लिख सकते है, उन अनुच्छेद को भावात्मक एवं विचारात्मक अनुच्छेद कहते है. हमने आपके लिए एक दोहे के ऊपर एक पूरा अनुच्छेद लिखा है, जो कि एक कवि के विचारों से निकलकर बना दोहा है. इस दोहे में कवि बार-बार करने वाले अभ्यास के बारे में कहता है.

करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान

संकेत बिन्दु – (1) सुक्ति का अर्थ (2) अभ्यास का महत्व (3) प्रेरक प्रसंग 

उपरोक्त उक्ति हिन्दी के रीतिकालीन प्रसिद्ध नीतिकार कवि वृंद के दोहे का पूर्वाद्ध है इनका पूर्ण दोहा निम्न प्रकार है-

“करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान,

रसरी आवत जात ते सिल पर पड़त निसान|“

अर्थात् निरंतर अभ्यास करते रहने से जड़ अर्थात् मंद बुद्धि का व्यक्ति भी ज्ञानी और विद्वान बन सकता है. जिस प्रकार कुँए से पानी निकालने हेतु बाल्टी को रस्सी से बाँधकर कुँए में डाल दिया जाता है और पानी से भरी बाल्टी को जब ऊपर खींचा जाता है तो कुएँ की दीवार के पत्थर पर रगड़ खाने वाली रस्सी के बार-बार आते जाते रहने से पत्थर पर निशान बन जाता है. तात्पर्य यह है कि एक ही क्रिया को बार-बार दोहराते रहने से यह पक्का हो जाता है. अतः अभ्यास ही ऐसी क्रिया है जिसे बार-बार करने से व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है.

महाकवि कालीदास के बारे में है कि वे भी निरंतर अभ्यास से महान विद्वान और कवि ब महाभारत के श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन के निरंतर अभ्यास का ही प्रतिफल था कि उन्होंने घूमती हुई मछली की आँख को भेद पाया. खिलाड़ियों एवं चिकित्सकों का प्रमाण हमें अपने आस-पास ही देखने को मिल जाता है. अर्थात् निरंतर अभ्यास ही एक मात्र मूल मंत्र है जो मूर्ख को भी चतुर, समझदार, ज्ञानी तथा विद्वान बना सकता है.

अनुच्छेद लिखने की रीति

हम अगर इन बातों का ध्यान रखे तो हम अनुच्छेद को बिल्कुल सटीकता से लिख सकते है.

  • किसी भी विषय पर अगर हमें अनुच्छेद लिखना है, तो हमें उस विषय की जानकारी होना अति आवश्क है.
  • चुने हुए विषय पर लिखने से पहले चिन्तन-मनन करे ताकि मूल भाव भली-भाँति स्पष्ट हो सके.
  • विषय को प्रस्तुत करने की शैली अथवा पद्धति तय होनी चाहिए.
  • लिखते समय सरल भाषा का प्रयोग करे एवं ध्यान रखे की विषय के अनुकूल होनी चाहिए.
  • मुहावरे और लोकोक्तियों आदि का प्रयोग करके भाषा को सुंदर एवं व्यावहारिक बनाने का प्रयास करे.
  • अनुच्छेद लिखते समय मात्राओं की गलती एवं कटा-पिटी ना हो इस बात को हमेशा याद रखे.

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