विश्व ह्रदय दिवस कब व क्यों मनाया जाता है | World Heart Day 2020 in Hindi

विश्व ह्रदय दिवस कब व क्यों मनाया जाता है? | World Heart Day 2020 in Hindi

हमारे शरीर के प्रत्येक अंग का अपना एक अलग महत्त्व है. जिसमें ह्रदय एक बहुत ही संवेदनशील आंतरिक अंग है. आज हमारे देश में दिन – प्रतिदिन ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है.

लोगों में इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता लाने के लिए सन 2000 में यह दिवस मनाने की पहल की गयी. तब तय हुआ कि सितम्बर माह के अंतिम रविवार को यह दिवस मनाया जाये लेकिन 2014 में इसके लिए 29 सितम्बर तिथि निर्धारित कर दी गयी. तब से ही प्रत्येक वर्ष 29 सितम्बर को यह दिवस (World Heart Day) मनाया जाने लगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन) के सहयोग से स्वयंसेवी संगठन ‘वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन’ हर साल ‘विश्व ह्रदय दिवस’ मनाता है. इस अवसर पर हर साल थीम भी निर्धारित की जाती है.

देश में ह्रदय रोगियों की संख्या दिन पर दिन क्यों बढ़ती जा रही है ?

आज के दौर में हम देखते हैं कि लोगों की जो दिनचर्या है काफी अव्यवस्थित व तनाव युक्त है. जिसमें सबसे ज्यादा जिम्मेदार उनका गलत खान – पान व तनाव युक्त जीवन है. ऊपर से पर्यावरण अतिशय प्रदूषित होता जा रहा है.

अक्सर पाया गया है कि जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप होता है उन्हें ह्रदय रोग जल्दी होता है. अब तो कम उम्र के लोगों में भी यही देखने को मिलता है, वे बहुत जल्दी ह्रदय रोग से ग्रसित हो रहे हैं . ह्रदय विशेषज्ञों के अनुसार ह्रदय रोग किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है. प्रत्येक वर्ष 1.71 करोड़ से भी ज्यादा लोगों की मृत्यु ह्रदय रोग के कारण ही होती है.

ह्रदय सम्बन्धी समस्याओं को हल करने, रोकथाम व जागरूकता लाने के लिए प्रत्येक वर्ष 29 सितम्बर को यह विश्व ह्रदय दिवस मनाया जाने लगा है. ह्रदय रोग इतना बढ़ गया है कि व्यक्ति अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं. ऐसे में इस विषय पर जागरूक होना अति आवश्यक है. इस गंभीर बीमारी के प्रति सभी को सचेत हो जाना चाहिए. तनावपूर्ण जीवन शैली इसका सबसे बढ़ा कारण है. आज के इस दौर में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी किसी न किसी तनाव से ग्रसित हैं, आज – कल लोग छोटी – छोटी समस्याओं को भी बहुत बड़ा मान लेते हैं, बच्चे अपने करियर को लेकर तनाव ग्रस्त हो जाते हैं, स्त्रियाँ अपनी ग्रहस्थी और पुरुष अपने व्यवसाय को लेकर अकसर तनाव ग्रस्त दिखाई देते हैं. ऐसे में जरुरत है कि वे सभी अपनी – अपनी बातों का साझा करें, सामंजस्य बिठाएं, समस्याओं का समाधान ढूंढें. लेकिन ऐसा नहीं होता है और वे अकेले ही अकेले घुटते जाते हैं और इसका सीधा प्रभाव ह्रदय व उनके मस्तिष्क पर पड़ता है. ऐसे में रक्त धमनियां ठीक से कार्य नहीं कर पाती और ह्रदय रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है.

ह्रदय रोग की समस्या से बचने के उपाय

इतनी गंभीर समस्या को देखते हुए हम सभी को सजग हो जाना चाहिए व स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए दिनचर्या निर्धारित करनी चाहिए, जिसके लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक हैं –

  • प्रतिदिन हल्का व्यायाम करना करें. सुबह – शाम टहलने जायें.
  • वसायुक्त, चिकनाई युक्त भोजन करने से बचें. जो लोग अत्यधिक मांस, अंडा आदि खाते हैं उनको यह समस्या ज्यादा होती है. नमक का सेवन कम मात्रा में करें.
  • पौष्टिक भोजन को अपने भोजन में शामिल करें. जो लोग सादा भोजन जैसे – दाल, दलिया खाते हैं उनको ह्रदय रोग कम होता है.
  • धूम्रपान, तम्बाकू का सेवन नहीं करना चाहिए. कैफीन का सेवन कम करें, ग्रीन चाय कासेवन करना चाहिए.
  • तनाव को दूर रखने के लिए मोटिवेशनल विडियो देखें व सकारात्मक सोच वाले व्यक्तियोंके सम्पर्क में रहें. इसके आलावा भरपूर नींद लें.
  • ह्रदय रोग को गंभीरता से लेना शुरू कर दीजिये, सुव्यवस्थित जीवन शैली बनाइये व दूसरे कोभी जागरूक कीजिये क्योंकि ‘दिल है तो ज़िन्दगी है’.

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