रक्षाबंधन से जुडी रोचक लघुकथा | Short Stories of Rakha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन के त्यौहार से जुडी रोचक लघुकथाएं | Interesting Short Stories related to Rakha Bandhan in Hindi | Rakha Bandhan Ki Kahaniyan

रक्षाबंधन का त्यौहार हिन्दू धर्म में कई वर्षों से मनाया जा रहा है. यह त्यौहार भाई-बहन के प्यार का त्यौहार है. इस त्यौहार में बहन भाई के हाथों पर राखी बाँध कर उसकी लम्बी उम्र की प्रार्थना करती है.

रक्षाबंधन से जुडी कहानियां (Stories of Rakshabandhan in Hindi)

रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर हिन्दू धर्मं में एक नहीं बल्कि कई सारी कहानियां हैं. जिनमे से प्रमुख कुछ इस प्रकार हैं.

राजा बलि और माँ लक्ष्मी की कहानी (Raja Bali and Laxmi Rakshabandhan Story)

रक्षाबंधन की शुरुआत सतयुग में हुई थी. राक्षसों का राजा बलि भगवान विष्णु का परम भक्त था. बलि ने तपस्या करने के बाद भगवान विष्णु से कहा कि वे उसके राज्य की रक्षा के लिए उसके राज्य में रहने आ जाए. भगवान विष्णु, बलि के राज्य की रक्षा के लिए अपनी सामान्य जगह को छोड़कर आ गये. लेकिन इस घटना से माँ लक्ष्मी उदास थी. वे चाहती थी कि उस समय विष्णु जी उनके साथ ही रहे. माँ लक्ष्मी राजा बलि के पास गयी.

माँ लक्ष्मी राजा बलि के सामने ब्राह्मण महिला का रूप लेकर गयी और राजा बलि से कहा कि वे उसके महल में रहना चाहती है. बलि ने उन्हें महल में रहने की आज्ञा दी. श्रवण पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी ने बलि के हाथ में राखी बाँधी पर बलि समझ नहीं पाया की ये उस ब्राह्मण महिला ने क्या किया. फिर माँ लक्ष्मी ने बलि को बताया कि वे कौन है और यहाँ क्या कर रही है. लक्ष्मी माता ने जब बलि को छुआ तो भगवान विष्णु के लिए उनकी इच्छा और प्यार को देखते हुए बलि ने विष्णु जी को वैकुण्ठम जाने की अनुमति दे दी. उस घटना के बाद से एक रीत चली आ रही है जिसमें बहन श्रवण पूर्णिमा के दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है.

भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी (Krishana and Draupadi Rakshabandhan Story)

लोगों की भलाई के लिए भगवान कृष्ण ने दुष्ट राजा शिशुपाल को मार दिया था. युद्ध में श्री कृष्ण की एक ऊँगली पर घाव हो गया था. उस ऊँगली से खून निकल रहा था. उस समय द्रौपदी वहां मौजूद थी और द्रौपदी सब देख रही थी. उसने तुरंत ही भगवान कृष्ण की उँगली पर अपनी साड़ी का एक टुकडा फाड़ कर बाँध दिया. भगवान कृष्ण ने अपने प्रति द्रौपदी के मन की चिंता और प्रेम के कारण उन्होंने द्रौपदी को अपनी बहन मान लिया. भगवान कृष्ण ने द्रौपदी से कहा की अगर उसे भविष्य में कोई भी तकलीफ आई तो वे उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे. कुछ वर्षों बाद पांडव द्रौपदी को कौरवों से पासे के खेल में हार गए थे. दुशासन ने द्रौपदी का चीरहरण किया था. उस समय भगवान ने द्रौपदी की साड़ी को अपनी शक्ति से बढ़ा दिया ताकि कौरव द्रौपदी के शरीर से साड़ी हटा ना सके.

रानी कर्णावती और हुमायूँ की कहानी (Rani Karnavati and Humayun Rakshabandhan Story)

रानी कर्णावती और हुमायूँ के बीच की कहानी रक्षाबंधन के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है. मध्यकालीन दौर में जब राजपूत और मुसलमान आक्रमणकारियों में लड़ाई चल रही थी. उस समय राखी का महत्व बहुत ज्यादा था. उस समय आध्यात्मिक बंधन और बहनों की सुरक्षा को प्रमुख माना जाता था. चित्तौड़ के राजा की विधवा, रानी कर्णावती की सेना गुजरात के सुल्तानों से नहीं लड़ पा रही थी. रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेजी. राखी से हुमायूँ खुश हुआ. जब हुमायूँ ने देखा की रानी कर्णावती की और उनके राज्य की स्थिति ख़राब थी. तो हुमायूँ ने बिना किसी देरी के अपने सैनिकों को रानी कर्णावती की मदद के लिए भेज दिया.

रोक्साना और पोरस की कहानी (Roxana and Poras Rakshabandhan Story)

300 ईसा पूर्व में जब सिकंदर भारत पर आक्रमण करने आया था. तब उसका सामना पोरस से हुआ था. पोरस ने सिकंदर को पहली मुलाकात में अपनी क्षमताओं से हिला दिया था. इस सब से सिकंदर की पत्नी रोक्साना मायूस थी. उसे लगा कि सिकंदर पोरस से हार जायेगा. रोक्साना ने राखी त्यौहार के बारे में सुना तो उसने राजा पोरस को राखी बांध कर मनाया. राजा ने रोक्साना को बहन मान लिया. जब युद्ध के मैदान पर पोरस और सिकंदर आमने-सामने थे. तब पोरस सिकंदर को मारने की बजाये उससे अपना बचाव कर रहा था.

इसे भी पढ़े :

Loading...

Leave a Comment