विश्व के सबस बड़े कलश में ले गये गंगाजल-

जब माँ गंगा के अनन्य भक्त माधोसिंह ने अपनी इग्लैंड यात्रा के दौरान गंगाजल को लंदन ले जाने के लिए विशेष रूप से बनाए गए चांदी के बड़े-बड़े कलशों का उपयोग किया था. जो कलश उस समय महाराज लंदन ले क्र गये थे उन्हें आज भी सिटी पैलेस में देखा जा सकता है. जिन बड़े-बड़े कलश को लेकर महाराज जी गये थे इसी गंगाजल से सफर में महाराजा का भोजन बनता और वे इसी जल का वह सेवन करते. यहाँ आपको बता दे की चांदी से बने इन कलश का आकार इतना बड़ा है कि इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है. इन कलशों में गंगाजल भरकर हरिद्वार से इंग्लैंड ले जाया गया.

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पूरे जहाज को ही गंगाजल से धुलवाया था-

ताजपोशी के लिए इंग्लैंड पानी के जहाज ‘ओलिम्पिया’ से गए तो पूरे जहाज को गंगाजल से धुलवाया और एक कक्ष में राधा गोपाल को स्थापित किया. उसके पहले जब उनकी ट्रेन जयपुर से मुंबई के लिए निकली तो उसके पहले ट्रेन तक जुलुस के रूप में राधा गोपालजी को पालकी में बिठाकर ले जाया गया. और उसके बाद जहाज से उतरकर इंग्लैंड की गलियों में आगे-आगे राधे-कृष्ण पालकी में और पीछे महाराज के साथ सेवा दल के लोग और कर्मचारी चल रहे थे, और इसी तरह वे अपने गंतव्य तक पहुचे थे. ये नजारा तब काफी चर्चा में था. जिसे देखकर हैरत से भरे अंग्रेजों की भीड़ इकट्टी हो गई.

3 जून 1902 का वह ऐतिहासिक दिन था जब किसी देवी-देवता का लंदन की सड़कों पर जुलूस निकला था. और लंदन की मीडिया में माधोसिंह जी को धर्म प्रयाण राजा कहा गया. लन्दन ही नहीं पूरी दुनिया में एक राजा के अपने इष्टदेव के प्रति अटूट श्रद्धा की बातें सुनकर लोग हैरत में थे. इनकी इस यात्रा का कुछ अंग्रेजों ने मखौल भी उड़ाया और इस यात्रा को एक अंधविश्वासी राजा की सनक तक लिखा. मगर राजा माधो सिंह ने अपनी श्रद्धा में भी कोई कमी नहीं आने दी.

हाथ मिलाने के बाद धोते थे हाथ-

महाराजा माधोसिंह ने अपनी इंग्लैंड प्रवास के दौरान अंग्रेजों से हाथ मिलाने के बाद महाराजा अपने हाथो को अपने साथ जयपुर से ले जायी गई मिट्टी से मलते और गंगाजल से हाथ धोकर वह स्वयं को पवित्र मानते.

http://www.dilsedeshi.com/wp-content/uploads/2017/01/king-of-jaipur-madhosingh-ji-dilsedeshi2-.jpghttp://www.dilsedeshi.com/wp-content/uploads/2017/01/king-of-jaipur-madhosingh-ji-dilsedeshi2--150x150.jpgManoj Kagइतिहासराष्ट्र सर्वोपरि