बीता अवसर हाथ नहीं आता पर अनुच्छेद | Article on Bita Avasar Hath Nahi Aata in Hindi

 बीता अवसर हाथ नहीं आता पर अनुच्छेद | Article on Bita Avasar Hath Nahi Aata in Hindi | Bita Avasar Hath Nahi AataPar Paragraph Hindi

हम जब किसी दोहे के अर्थ को चिन्तन-मनन करके मूल भाव भली-भाँति स्पष्ट करके उसके बारे में अनुच्छेद लिखते है. तो वें भावात्मक एवं विचारात्मक अनुच्छेद कहलाते है. हमने आपके लिए “बीता अवसर हाथ नहीं आता” पर जो अनुच्छेद लिखा है वह अनुच्छेद अक्सर परीक्षा में अन्य विषयों पर लिखने को आ जाता है, जैसे समय बड़ा बलवान, समय बहुमूल्य है, वक्त की पाबंदी या समय का सदुपयोग आदि यह सभी विषय अलग-अलग हो मगर इन सभी का मूल रूप एक ही है.

बीता अवसर हाथ नहीं आता

संकेत बिन्दु – (1) समय/वक्त/अवसर का महत्व (2) वक्त की पाबंदी (3) उदाहरण.

समय का पर्याय काल है जिसे 3 भाग में बाँटा गया है- भूत, वर्तमान एवं भविष्य काल आज अर्थात् वर्तमान जो है वह आने वाले समय के लिए भूत की संज्ञा प्राप्त करता है और जो भविष्य के नाम से जाना जा रहा है वह आने वाले कल के लिए वर्तमान का रूप ले लेगा. अर्थात् समय/वक्त या काल गतिशील है जिसे पकड़ा या रोका नहीं जा सकता है. इसलिए समय बड़ा बलवान की कहावत है. मानव को निर्धारित समय पर अपना कार्य पूर्ण कर लेना चाहिए वरन वक्त बीत जाने के बाद सिर्फ पछतावा करने के अलावा कुछ नहीं रहेगा. यह विद्यार्थियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक सत्र में एक निश्चित कक्षा की परीक्षाएँ निर्धारित होती हैं. उस परीक्षा में प्रवेश करने की तैयारी पहले से आरंभ कर लेनी चाहिए और उस परीक्षा को निर्धारित समय पर ही देना चाहिए. यदि विद्यार्थी परीक्षा देने से वंचित हो जाए तो वह अगली कक्षा में प्रवेश नहीं कर पाएगा और ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत, ‘ की कहावत चरितार्थ हो जाएगी. जीवन के अच्छे अवसर बार-बार नहीं आते हैं अतः सुअवसर को हाथ से जाने नहीं देना ही बुद्धिमानी है यह वक्त की पाबंदी से ही संभव है. अतः मानव मात्र को वक्त से पहले ही अपने लक्ष्य/कर्म की योजना बना लेनी चाहिए. कबीर दास जी का यह दोहा यही संदेश देता है.
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥”

अनुच्छेद लिखने की रीति

हम अगर इन बातों का ध्यान रखे तो हम अनुच्छेद को बिल्कुल सटीकता से लिख सकते है.

  • विषय को प्रस्तुत करने की शैली अथवा पद्धति तय होनी चाहिए.
  • अनुच्छेद लिखते समय मात्राओं की गलती एवं कटा-पिटी ना हो इस बात को हमेशा याद रखे.किसी भी विषय पर अगर हमें अनुच्छेद लिखना है, तो हमें उस विषय की जानकारी होना अति आवश्क है.
  • चुने हुए विषय पर लिखने से पहले चिन्तन-मनन करे ताकि मूल भाव भली-भाँति स्पष्ट हो सके.
  • लिखते समय सरल भाषा का प्रयोग करे एवं ध्यान रखे की विषय के अनुकूल होनी चाहिए.
  • मुहावरे और लोकोक्तियों आदि का प्रयोग करके भाषा को सुंदर एवं व्यावहारिक बनाने का प्रयास करे.

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