प्लास्टिक मुक्त भारत पर अनुच्छेद | Article on Plastic Free Bharat in Hindi

प्लास्टिक मुक्त भारत पर अनुच्छेद | Article on Plastic Free Bharat in Hindi | Plastic Mukt Bharat Par Paragraph

प्लास्टिक का प्रयोग आज के समय में बढ़ता ही जा रहा है, जो मानव जाति को समाप्त भी कर सकता है. हमारा विषय “प्लास्टिक मुक्त भारत” एक ऐसा विषय है, जिसके बारे में सभी भारतीय विचार करता है एवं यह एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर हिंदी परीक्षा में अक्सर अनुच्छेद पूछ लिए जाते है.

प्लास्टिक मुक्त भारत

संकेत बिन्दु – (1) प्लास्टिक का उपयोग (2) विशिष्ट उत्पादन (3) जहरीली गैसों (4) प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त

आजकल प्लास्टिक का उपयोग हर जगह हो रहा है जिसके कारण मानव प्रकृति के अनुदान से लाभान्वित होता गया उसके लोभ में बढ़ोतरी होती गई. प्रकृति का ख्याल रखे बगैर कई मानवीय गतिविधियों से ऐसे आविष्कार हुए, ससे प्रकृति को नुकसान होना शुरू हुआ. नतीजा प्रकृति के नाम पर मानव ने प्रकृति में बहुत ज्यादा हस्तक्षेप किया. इन अनेक आविष्कारों में एक प्लास्टिक को भले ही मानव का आविष्कार क्यों न माना जाए लेकिन यही प्लास्टिक उसकी प्रकृति का सबसे बड़ा शत्रु बनकर उसे प्रदूषित कर रहा है. जिस प्रकृति ने हमारे पूर्वजों को एक अच्छा वातावरण दिया और आगे भी यह प्रकृति हमें तथा हमारी भावी पीढ़ियों को अच्छा वातावरण देने में तत्पर है मगर न जाने क्यों प्लास्टिक प्रदूषण से हम प्रकृति का गला घोटने को उतारू हैं ?

देर से ही सही शुरुआत तो हुई. आज भारत में इस समस्या को समाप्त करने में थोंडी गंभीरता की झलक देखने को मिलती है.कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक के कुछ विशिष्ट उत्पादों के प्रयोग को गैरकानूनी घोषित कर इसके प्रयोग को कम करना शुरू किया गया है. 
विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत में हुए कार्यक्रमों को ऐतिहासिक बताते हुए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख एरिक सोलहेम ने इसके लिए भारत की प्रशंसा की है.उन्होंने कहा है कि भारत ने एक बार के इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाने वाले प्लास्टिक को 2022 तक समाप्त करने की घोषणा कर वैश्विक नेतृत्व और पर्यावरण के प्रति गंभीरता दिखाई है.

मगर भारत को इन बड़ी-बड़ी घोषणाओं और वादों के स्थान पर इस प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने की कोशिशों पर जोर देना होगा.
लिखने वाले ने भी क्या बात लिखी है कि “वादे तो अक्सर टूट जाया करते हैं लेकिन कोशिशें कामयाब हो जाया करती हैं।” वहीं दूसरी ओर भारत में इस प्रदूषण को समाप्त करने की कोशिश करते हुए आमतौर पर प्लास्टिक को या तो गड्ढे में भर दिया जाता है या इसे जला कर खत्म कर दिया जाता है. मगर दोनों गलत तरीके हैं. गड्ढे में दबाने पर वहाँ की जमीन बंजर हो जाती है और इसे जलाने से वायु में जहरीली गैसों से वायु प्रदूषित होती है. इन बेकार की कोशिशों से परे एक बड़ी कोशिश यह होनी चाहिए कि हम दिनचर्या व जीवन शैली को बदलकर प्लास्टिक पर निर्भरता कम करें और प्लास्टिक की जगह अन्य विकल्पों को अपनाएँ जो प्रकृति के अनुकूल हो.

नि:संदेह भारत ने इस प्रदूषण को समाप्त करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं जैसे कई राज्यों में विशिष्ट प्लास्टिक प्रयोग को गैरकानूनी मानना और सरकार व आम जनता में इस प्रदूषण को समाप्त करने के प्रति गंभीरता दिखाई देना प्रारंभ हो चुका है मगर इन प्रयासों को निरंतर रखना जरूरी है क्योंकि भले ही बारिश की बूँदें छोटी-छोटी क्यों न हों उसका निरंतर बरसना एक दिन नदी का रूप ले लेता है इसलिए भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने में निरंतरता रखनी होगी तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ी को हरित व पर्यावरण अनुकूल विरासत दे पाएँगे।प्लास्टिक के दुष्प्रभाव को देखते हुए पूरी दुनिया तथा भारत सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन करने तथा प्लास्टिक को रिसाइक्लिंग करने के कदम को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है. 
अतः हम सबका यह कर्त्तव्य है कि मानव जाति तथा जीव-जंतुओं के कल्याण के लिए प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए अपना योगदान देना चाहिए.

अनुच्छेद लिखने की रीति

हम अगर इन बातों का ध्यान रखे तो हम अनुच्छेद को बिल्कुल सटीकता से लिख सकते है.

  • लिखते समय सरल भाषा का प्रयोग करे एवं ध्यान रखे की विषय के अनुकूल होनी चाहिए.
  • मुहावरे और लोकोक्तियों आदि का प्रयोग करके भाषा को सुंदर एवं व्यावहारिक बनाने का प्रयास करे.
  • चुने हुए विषय पर लिखने से पहले चिन्तन-मनन करे ताकि मूल भाव भली-भाँति स्पष्ट हो सके.
  • विषय को प्रस्तुत करने की शैली अथवा पद्धति तय होनी चाहिए.
  • किसी भी विषय पर अगर हमें अनुच्छेद लिखना है, तो हमें उस विषय की जानकारी होना अति आवश्क है.
  • अनुच्छेद लिखते समय मात्राओं की गलती एवं कटा-पिटी ना हो इस बात को हमेशा याद रखे.

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