कचरे से होने वाले दुष्प्रभाव | Side Effects Of Garbage In Hindi

कचरे के दुष्प्रभाव पर निबंध | Side Effects Of Garbage In Hindi : स्वच्छता के प्रति इतना जागरूक होने के बाद भी लोग अपने आस-पास कूड़ा -कचरा फैलाते हैं. आपने अक्सर देखा होगा कि लोग घर से निकले कूड़े -करकट को यूँही घर के आस-पास फेंक देते हैं और उसमें न जाने कितने ऐसे पदार्थ होते हैं जो पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित करते हैं. लोगों में अभी भी जागरूकता की कमी है और जो लोग इसके प्रति जागरूक हैं वे भी पूरी तरह इसका अनुसरण नहीं करते. लोगों की इस लापरवाही से पर्यावरण पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि कचरे का ठीक तरीके से निष्पादन नहीं किया जा रहा है . कचरा फैलाने से हो रहे दुष्प्रभाव(Side Effects Of Garbage) को हम निम्नलिखित तथ्यों द्वारा समझ सकते हैं.

कचरे के दुष्प्रभाव पर निबंध | Side Effects Of Garbage In Hindi

  • घर का कूड़ा-करकट यहाँ वहाँ फेंकने से वह सड़ता रहता है और दुर्गन्ध पैदा करता है. वहीँ कूड़ा-करकट कई कीटाणुओं को जन्म देता है जिससे अनेकों गंभीर बीमारी हो जाती हैं. अतः इस स्थिति में भयंकर दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं.
  • प्लास्टिक, पोलिथीन आदि को फेंकने से यह पर्यावरण में धीरे-धीरे अपघटित होती है और इसके रसायन आस – पास के पर्यावरण में घुलने लगते हैं और भूमि की उर्बरा शक्ति को घटाने लगते हैं.
  • प्लास्टिक का छोटा रूप माइक्रोबिड्स बहुत ही ज्यादा खतरनाक तत्व है जो पर्यावरण पर अपना दुष्प्रभाव डालता है. माइक्रोबिड्स का प्रयोग सौन्दर्य उत्पादों में किया जाता है.
  • उपयोग की गयी कांच की बोतल को भी लोग यहाँ-वहाँ फेंक देते हैं, बाद में यही बोतल टूट जाती है और लोगों को तो नुकसान पहुंचाती ही है और जानवारों के लिए तो जानलेवा सिद्ध होती है.
  • प्लास्टिक का कचरा हजारों सालों तक नष्ट नहीं होता और यही कचरा नदियों में जाता है और जल को दूषित करता है और इसका दुष्प्रभाव जलीय जीवों पर भी पड़ता है. इसके दुष्प्रभाव से हर साल लगभग 1 लाख से भी अधिक जलीय जीवों की मृत्यु होती है.
  • जैसे-जैसे देश विकसित होते जा रहे हैं वैसे-वैसे ही प्रदुषण का बढ़ना चरण सीमा पर है, जिसमें फैक्ट्रियों से निष्कासित रासायनिक पदार्थ भूमि को और जल को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.
  • ई-कचरा विज्ञान की तरक्की और खोजों के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में दिन प्रतिदिन नई-नई खोजें हो रही हैं. क्या आपको पता है मोबाइल बैटरी को हम यहाँ-वहां फेंक देते हैं और यही बैटरी जल को दूषित करती है. ख़राब बैटरी कई लीटर पानी को दूषित करती है. यही कचरा आजकल ई-कचरा नाम से जाना जाता है.
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की बिक्री आजकल इस कदर बढ़ रही है कि लोग एक उत्पाद का प्रयोग करके दूसरे उत्पाद को कबाड़ में फेंक देते हैं और यही कबाड़ पर्यावरण को दूषित कर रहा है क्योंकि इनसे जहरीले तत्व व गैसें निकलती हैं.
  • कई जगहों पर कचरे से छुटकारा पाने के लिए उसे जला दिया जाता है लेकिन उसका जहरीला धुआं वायु प्रदुषण का बहुत बड़ा कारण बनता है साथ ही इसका जहरीला धुआं फेफड़ों पद सीधा प्रभाव डालता है, इससे कई बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं.
  • नदियों और तालाबों में लोग कचरा फेंक देते हैं और इसी का पानी पीने में उपयोग करते हैं जिससे बीमारियों का होना संभव ही है. नालों में कचरा जमा होने से कई विषैले जीवाणु जन्म ले लेते हैं, मच्छर-मक्खियाँ उत्पन्न हो जाती हैं वही मक्खियाँ हमारे भोजन पर बैठती हैं और हमारा भोजन दूषित कर देती हैं जिससे कई बीमारियाँ हो जाती हैं जैसे – डायरिया, डेंगू आदि.

कचरे का निष्पादन ठीक तरीके से न करना मानव जाति के लिए संकट का काल कब बन जाए ये किसी को पता भी नहीं चलेगा. इसीलिए सभी को सचेत हो जाना चाहिए और कम से कम वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए जिससे उसका निष्पादन करने में पर्यावरण पर कोई प्रभाव न पड़े.

इसके लिए हमें खुद सजग हो जाना चाहिए कि हमें अपनी प्रकृति का संरक्षण करना है व आवश्यकता से अधिक चीज़ों का उपयोग नहीं करना है. तभी प्रकृति द्वारा स्वचलित चक्र में हम अपना सहयोग दे पाएंगे. खुद भी कचरा न फेंके व दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें.

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