देवउठनी एकादशी का महत्व और पूजा विधि | Dev Uthani Gyaras ka Mahatva aur Puja Vidhi in Hindi

देवउठनी एकादशी का महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त समय और शायरियां | Dev Uthani Gyaras ka Mahatva, Puja Vidhi, Muhurat Samay aur Shayariya in Hindi

देवउठनी एकादशी जिसे तुलसी विवाह और प्रबोधनी ग्यारस भी कहा जाता हैं. हिन्दू धर्म में इस दिन का बहुत अधिक महत्व हैं. देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह के शयन के बाद जागे थे. हिन्दू धर्म में इस दौरान चार माह तक कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किया जाता हैं. और देवउठनी एकादशी के शुभ दिन से ही सभी मांगलिक और धार्मिक कार्य शुरू किये जाते हैं. इस दिन पूरे भारतवर्ष में तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता हैं.

देवउठनी एकादशी (तुलसी विवाह) मुहूर्त (Dev Uthani Gyaras Muhurat)

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी का त्यौहार मनाया जाता हैं. वर्ष 2018 में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह 19 नवंबर सोमवार को है.

मुहूर्त: प्रातः 06 बजकर 48 मिनट से 08 बजकर 56 मिनट तक

देव उठनी ग्यारस व्रत पूजा विधि

  • इस दिन सर्वप्रथम सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए.
  • इस दिन पूजन करने वाले निराहार व्रत भी रखते हैं. बहुत सी महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास भी रखती हैं.
  • इस दिन भगवान लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती हैं.
  • एकादशी के दिन घरों में चावल नहीं बनायें जाते हैं.
  • बहुत से घरों में भजन आदि का आयोजन किया जाते हैं.
  • पौराणिक कथाओं की मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से कई जन्मों का उद्धार होता है.

तुलसी विवाह कथा (Tulsi Vivah Katha)

तुलसी एक औषधीय पौधा है जो अपने लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है. यह वातावरण को शुद्ध तो करता ही है साथ ही वह अपने आस-पास सकारात्मक वातावरण को उत्पन्न करता है.

तुलसी, राक्षस जालंधर की पत्नी थी. तुलसी सर्वगुण संपन्न एक सद्गुणों वाली महिला थी. राक्षस जालंधर बहुत ही पापी था. रक्षक जालंधर के कर्मों की वजह से तुलसी बहुत दुखी रहती थी. इसलिए वह हर समय अपना मन नारायण भक्ति में व्यतीत करती थी. जालंधर के बढ़ते पापों के कारण भगवान विष्णु ने उसका संहार किया और तुलसी अपने पति की मृत्यु के बाद सती धर्म को अपनाकर सती हो गई. पौराणिक मान्यता के अनुसार उस सती की भस्म से ही तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ और उनके ओजस्वी विचारों एवं गुणों के कारण तुलसी का यह औषधीय पौधा आज इतना गुणकारी है. तुलसी के सत कर्मो की कारण भगवान विष्णु ने अगले जन्म में तुलसी से विवाह किया. इसीलिए देवउठनी ग्यारस के दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है.

तुलसी स्तुति मंत्र (Tulsi Sthuti Mantra)

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरै:
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये

तुलसी पूजन मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी.
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया.
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्.
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया.

देवउठनी ग्यारस की शायरी (Dev Uthani Gyaras Shayari)

उठो देव हमारे, उठो इष्ट हमारे
खुशियों से आंगन भर दो,
जितने मित्र रहे रहे दुख सुख में सहारे
देवउठनी ग्यारस की हार्दिक शुभकामनाएं

तुलसी संग शालिग्राम ब्याहे
सज गई उनकी जोड़ी
तुलसी विवाह संग लगन शुरू हुए
जल्दी लेकर आओ पिया डोली
शुभ तुलसी विवाह

हर घर के आँगन में तुलसी,
तुलसी बड़ी महान है,
जिस घर में यह तुलसी रहती,
वह घर स्वर्ग समान है.
तुलसी विवाह और देवउठनी ग्यारस की हार्दिक शुभकामनाएं

सबसे सुंदर वह नजारा होगा,
दीवार पर दीयों का माला होगा,
घर आंगन में तुलसी मां विराजे की
और आपके लिए पहला विश हमारा होगा.
हैप्पी तुलसी विवाह

गन्ने के मंडप सजाएंगे हम,
विष्णु-तुलसी का विवाह रचाएंगे हम,
आप भी होना खुशियों में शामिल,
एकादशी का पर्व मिलकर मनाएंगे हम।
देवउठनी एकादशी की शुभकामनाएं
तुलसी विवाह की हार्दिक शुभकामनाएं

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Shashank Sharma

Shashank Sharma

शशांक दिल से देशी वेबसाइट के कंटेंट हेड और SEO एक्सपर्ट हैं और कभी कभी इतिहास से जुडी जानकारी पर लिखना पसंद करते हैं.

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