गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता हैं और इसका महत्व | Gudi Padwa 2021

गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता हैं, कब हैं और इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
Gudi Padwa Celebration 2021 Reasons, Date and Religious and Historical Significance in Hindi

गुड़ी पड़वा एक ऐसा त्यौहार हैं जो हिन्दू संस्कृति की शुरुआत से मनाया जा रहा हैं. जिस तरह अंग्रेजी सभ्यता में 1 जनवरी का महत्व होता हैं उसी तरह हिन्दू रीति-रिवाज़ों में गुड़ी पड़वा का महत्व होता हैं. भारतवर्ष का सर्वमान्य सवंत विक्रम सवंत हैं. जिसका प्रथम महिना चैत्र माह होता हैं. इस माह के प्रथम दिन को गुडी पड़वा मनाया जाता हैं.

बिंदु (Point)जानकारी (Information)
नाम (Name)गुडी पड़वा
विक्रम संवत (Vikram Sanvat)2078
कब हैं (Date in 2021)13 अप्रैल
वार (Day)मंगलवार
अन्य नाम (Other Name)संवत्सर पड्यो, युगादी, उगादी, चेटीचंड और नवरेह
प्रतिपदा तिथि आरम्भ (Pratipada Tithi Begins)08:00 पूर्वाहन (12 अप्रैल)
प्रतिपदा तिथि समाप्त (ratipada Tithi Ends)10:16 पूर्वाहन (13 अप्रैल)

गुडी पड़वा मनाने का कारण (Reason for celebrating Gudi Padwa)

गुड़ी पड़वा केवल एक ही कारण से नहीं मनाया जाता हैं इस दिन कई घटनाएँ हुई थी जो कि हिन्दू मान्यताओं में काफी अहम योगदान रखती हैं. इसीलिए इस तारीख को मनाने पर कभी एक राय नहीं बनानी. यह हैं इस त्यौहार को मनाने के कुछ कारण

  • ब्रम्हपुराण के अनुसार इसी दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि का प्रारंभ हुआ. इसी कारण इस तिथि को सर्वोतम माना जाता हैं.

चैत्र मासे जगद्ब्रह्म समग्रे प्रथमेऽनि

शुक्ल पक्षे समग्रे तु सदा सूर्योदये सति। -ब्रह्मपुराण

  • हिन्दू पंचांग विक्रम सवंत का आरम्भ गुड़ी पड़वा से ही होता है. महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, मास और वर्ष की गणना कर विक्रम सवंत की रचना की थी. उस समय की गयी गड़ना आज के कालखंड की गडना में एक दम सटीक बैठती हैं.
  • गुड़ी पड़वा को लेकर एक और मान्यता यह है कि इसी दिन भगवान् श्री राम ने दक्षिण के लोगों को बाली के अत्याचारों से मुक्त करवाया था. जिसकी ख़ुशी में लोगों में विजय पताकाएँ फहराई थी.
  • एक और मान्यता भगवान श्रीराम से ही जुडी हुई हैं जिसके अनुसार इस दिन भगवान् श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था.
  • इस दिन उज्जैयिनी की सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित कर विक्रम संवत का प्रवर्तन किया.
  • इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था. इसी दिन से रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा होने लगता है.
  • इस दिन युधिष्ठिर ने राज्यारोहण किया था.
  • महर्षि दयानन्द द्वारा आर्य समाज की स्‍थापना का दिवस
  • इसी दिन से माँ दुर्गा का उपासना पर्व नवरात्री की शुरुआत होती हैं.
  • गुड़ी पड़वा पर ही सिखों के द्वितीय गुरु गुरु अंगद देव जी के जन्म हरीके नामक गांव में, जो कि फिरोजपुर, पंजाब में हुआ था.
  • गुडीपड़वा के दिन सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल का प्रकट दिवस हुआ था.

गुड़ी पड़वा का महत्व (Significance of Gudi Padwa 2021 in Hindi)

“गुड़ी पड़वा” एक मराठी शब्द है जिसमे “पडवा” मूल रूप से संस्कृत से लिया गया है. जिसका वास्तविक अर्थ है “चैत्र शुक्ल प्रतिपदा”. महाराष्ट्र सबसे प्रमुख वीर योद्धा और महाराज छत्रपति शिवाजी थे, जिन्होंने इस दिन को नए साल के रूप में भव्य समारोह के साथ जीत की “विजयाध्वज” के प्रतीक के रूप मनाया था. इसके बाद इस दिन शिवाजी के उत्सव का प्रभाव महाराष्ट्र की एक मुख्य धारा में रम गया.

महाराष्ट्रियन तरीके से वर्ष का पहला दिन शुभ और पवित्र होता है और इसे हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है. इस दिन का महत्व भारत में फसल के उत्सव को भी दर्शाता है. इसका मतलब है कि रबी फसलों की फसल खत्म हो चुकी है और साल की शुरुआत में ताजे फलों की बुवाई करके स्वागत किया जाता है जैसे कि आम के दिन बड़े भाग्यशाली होते हैं.

इस दिन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं. यह भी माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन ब्रह्मांड की रचना की थी. भगवान ब्रह्मा के भक्त इस शुभ दिन एक पवित्र तेल स्नान करते हैं. साथ ही कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह दिन भगवान राम के राज्याभिषेक समारोह का प्रतीक है, जो 14 साल का वनवास बिताकर अयोध्या लौटे थे. इन मान्यताओं के अलावा, इस दिन एक और शुभ घटना के बारे में बहुत से लोगों को पता नहीं है, इसी दिन शकों ने हूणों पर जीत दर्ज की.

इस दिन किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठानों को एक पवित्र स्नान, नए कपड़े पहनकर पूजा के रूप में किया जाता है. सामने के गेट या मुख्य द्वार में रंगीन रंगोलिस की ड्राइंग का पालन करके घर को सजाने के लिए, फूलों का उपयोग घरों को जीवंतता और रंगीन फूलों से रोशन करने के लिए किया जाता है. एक नया कलश तांबे या चांदी से बना होता है और रंग और केसरिया कपड़े से ढंका होता है और प्रवेश द्वार पर उल्टा फहराया जाता है. सभी सजावट और अनुष्ठान किए जाने के बाद नीम और गुड़ का प्रसाद बनाया जाता है.

गुड़ी को महाराष्ट्र में मनाया जाता है लेकिन अन्य राज्य भी हैं जिन्होंने इस अवसर को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य उगादी को नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं. सिंधियों में चेटी चंड मनाया जाता है. केरल में, “विशु” को लुनिसोलर के सौर चक्र के रूप में मनाया जाता है, जिसे महीने का पहला दिन कहा जाता है. सिख धर्म में, वैसाखी को खालसा के जन्म के रूप में मनाया जाता है और सिख क्षेत्र में जीवन जीने के खालसा तरीके के

गुड़ी पड़वा का अर्थ (Meaning of Gudi Padwa)

दो शब्दों में मिलकर बना हैं गुड़ी पड़वा. जिसमे गुडी का अर्थ होता हैं विजय पताका और पड़वा का मतलब होता हैं प्रतिपदा. इस दिन गुडी बनाकर उसे फहराया जाता हैं और उसकी पूजा की जाती हैं. यह प्रथा महाराष्ट्र और उससे जुड़े कुछ राज्यों में मनाई जाती हैं. इसके अलावा घर के दरवाजों पर आम के पत्तों से बना बंदनवार सजाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि यह बंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशि‍याँ लाता है.

गुड़ी पड़वा कैसे मनाया जाता हैं (How is gudi padva celebrated)

गुड़ी पड़वा के दिन खास तौर से हिन्दू परिवारों में पूरनपोली नामक मीठा व्यंजन बनाने की परंपरा है, जिसे घी और शक्कर के साथ परोसा जाता है. वहीं कुछ मराठी परिवारों में इस दिन खासतौर पर श्रीखंड बनाया जाता है और अन्य व्यंजनों व पूरी के साथ परोसा जाता है.

आंध्रप्रदेश में इस दिन प्रत्येक घर में पच्चड़ी प्रसाद बनाकर वितरण किया जाता है. गुड़ी पड़वा के दिन नीम की पत्त‍ियां खाने का भी विधान है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर नीम की कोपलें खाकर गुड़ खाया जाता है. इसे कड़वाहट को मिठास में बदलने का प्रतीक माना जाता है.

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