श्रीमती तारा सिंह का जीवन परिचय | Dr. Tara Singh (Author) Biography In Hindi

श्रीमती तारा सिंह का जीवन परिचय, रचनाएँ
Dr. Tara Singh (Author) Biography, Birth, Age, Education, Awards, Poems, In Hindi

श्रीमती तारा सिंह हिंदी साहित्य की छायावाद की कवियित्री रही है. इन्होंने कविताएं, गीत, उपन्यास एवं गज़ल की रचनाएं की है. इनकी अधिकतर रचनाएं पारिवारिक, सामाजिक मुद्दों एवं जीवन व वास्तविकताओं के दर्शन पर आधारित रहती है. इन्होंने हिंदी साहित्य में 21 वीं शताब्दी की आधुनिक “छायबडी कविता” के रूप में खुद को स्थापित किया है. इनके साहित्यिक योगदान के लिए इन्हें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से 253 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं.

Dr. Tara Singh (Author) Biography In Hindi

श्रीमती तारा सिंह का जीवन परिचय | Dr. Tara Singh Biography In Hindi

बिंदु (Points)जानकारी (Information)
नाम (Name)डॉ. तारा सिंह’
जन्म (Date of Birth)10 अक्टूबर 1952
आयु 70 वर्ष
जन्म स्थान (Birth Place)जबलपुर, मध्य प्रदेश
पिता का नाम (Father Name)एसपी बक्शी
माता का नाम (Mother Name)ज्ञात नहीं
पति का नाम (Husband Name)डॉ ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह
पेशा (Occupation )लेखक, कवि, उपन्यासकार, संपादक
बच्चे (Children)ज्ञात नहीं
उपाधि (Award)साहित्य रत्न , राष्ट्रभाषा विद्यालंकार, विद्या वाचस्पति, विद्या वारिधि

श्रीमती तारा सिंह प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा | Dr. Tara Singh Education

डॉ. श्रीमती तारा सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1952 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. बचपन से ही उन्हें नृत्य और संगीत के साथ-साथ कविताएँ लिखने का शौक था. उनकी हिंदी साहित्य में अधिक रुचि थी. जिसके कारण कई मौकों पर स्कूल और कॉलेज के दौरान साहित्यिक बहसों में उन्हें उनकी कविताओं और प्रदर्शनों के लिए पुरस्कार और प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल से प्राप्त की. इसके पश्चात उन्होंने एम.बी.ई.एच. की डिग्री प्राप्त की. इसी क्रम में उन्होंने ओरियेन्टल लर्निंग से पी.एच. डी. की. इसके कुछ समय बाद तारा सिंह का विवाह कलकत्ता कालेज़ के रसायन विभागाध्यक्ष, डॉ. बी. पी. सिंह के साथ हुआ.

श्रीमती तारा सिंह का साहित्यिक जीवन परिचय

श्रीमती तारा सिंह को बचपन से ही नृत्य, संगीत एवं कविता लेखन से विशेष लगाव रहा है.  स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना पूरा समय और ऊर्जा हिंदी साहित्य की सेवा में दी. इनके द्वारा कविताएँ, गज़ल , कहानियाँ , उपन्यास और फिल्मी गीत लिखे गए है तथा वर्तमान में भी लिखे जा रहे है. उनकी काव्य रचनाएं समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होने लगी. इसके साथ जल्द ही उन्हें कलकत्ता स्टार टी.वी. पर अपने लेखन को स्थान मिला. उनके द्वारा लिखे गए लेखों और कविताओं को 29 लोकप्रिय हिंदी वेबसाइटों पर प्रकाशित किया गया है, जिनमें स्वर्गाविभा भी शामिल हैं. तथा स्वर्गविभा वेबसाइट की वह अध्यक्ष भी है. तारा सिंह के द्वारा रचित एक गीत को 2008 में रिलीज़ हुई एक हिंदी फिल्म ‘सिपाही’ के शीर्षक गीत के रूप में चुना गया था. इसके साथ ही उनकी 8 ऑडियो बुक्स (उपन्यास -2, स्टोरी बुक्स -3, कविता बुक्स -3) को ‘कुकू एफएम’ द्वारा लगातार प्रसारित किया जा रहा है. तथा उनकी रचनाओं को श्रोताओं द्वारा काफ़ी पसन्द किया जा रहा है. वर्तमान में वे साहित्यिक, संस्कृत और कला संगम अकादमी, प्रतापगढ़ (उत्तरप्रदेश) के कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर पदस्थ हैं.

कवित्री तारा सिंह की रचनाएं:-

एक बूँद की प्यासी, सिसक रही दुनिया, हम पानी में भी खोजते रंग,  एक पालकी चार कहार, साँझ भी हुई तो कितनी धुँधली,  एक दीप जला लेना,  रजनी में भी खिली रहूँ किस आस पर, अब तो ठंढी हो चली जीवन की राख,  यह जीवन प्रातः समीरण-सा लघु है प्रिये, तम की धार पर डोलती जगती की नौका,  विषाद नदी से उठ रही ध्वनि,  नदिया-स्नेह बूँद सिकता बनती, यह जग केवल स्वप्न असार,  सिमट रही संध्या की लाली, जीवन की रेती पर, नक्षत्र लोक

गज़ल संग्रह

  • नगमें हैं मेरे दिल के
  • खिरमने गुल
  •  बर्गे यासमन
  •  सैरे गुल
  • सैर-ए-गुलिस्तां
  • सू-ए-कमन
  •  गुलिस्तान-ए-हयात

उपन्यास

  • दूसरी औरत

कहानी संग्रह

  • तृषा

श्रीमती तारा सिंह द्वारा रचित प्रसिद्ध गज़ल एवं कविता की कुछ पंक्तियां | Dr. Tara Singh Poem

गज़ल-

आँख उनसे मिली तो सजल हो गईप्यार बढने लगा तो गजल हो गई.
रोज कहते हैं आऊँगा आते नहीं
उनके आने की सुनके विकल हो गई.
ख्वाब में वो जब मेरे करीब आ गये
ख्वाब में छू लिया तो कँवल हो गई.
फिर मोहब्बत की तोहमत मुझ पै लगी
मुझको ऐसा लगा बेदखल हो गई.

कविताचाहती हूँ ,मैं  भी   अमर  हो   जाऊँ‘-

चाहती  तो  मैं  भी  हूँ, अमावस  की
अमर  गोद  में डूबकर, अमर हो जाऊँ
अंगारे  को  गूँथकर  गले   में  पहनूँ
अणु-अणु में संचित कर वेदना का गान
युग-युग  की तुम्हारी पहचान बन जाऊँ.
अपने   मृदु  पलकों   को  मुँदकर
दुख की मरकत प्याली से,अतीत को
पी  लूँ , बूँद-बूँद कर आँसू छलकाऊँ
अंगारे   का   पुष्प   सेज  सजाऊँ
सोकर   भस्म   शेष   रह   जाऊँ.
तुम्हारी स्मृतियों के तार को,अपने स्वर
तरंग  से, सूने  नभ को झंकृत कर दूँ
सो   रहे  तारक – किरण – रोमावली
नीड़ों  में  अलस  विहग, को  जगा दूँ.
चाहती  तो  मैं  भी  हूँ, अमावस  की
अमर  गोद  में डूबकर, अमर हो जाऊँ..

पुरस्कार एवं सम्मान | Dr. Tara Singh Awards

साहित्य महोपाध्याय, कवि कुलाचार्य, भारती रत्न, वर्ल्ड लाइफ़ टाइम अचीवमेन्ट अवार्ड, वोमेन आफ़ दी ईयर अवार्ड,राजीव गांधी अवार्ड,गोल्ड स्टार एशिया इन्टर्नेशनल अवार्ड, एशिया पैशफ़िक इन्टर्नेशनल अवार्ड,एचीवर आफ़ मिलेनियम अवार्ड, भारत-नेपाल सद्भावना अवार्ड,मदर टेरेसा अवार्ड.

 इसके अलावा इन्हें 253 राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है.

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