गुलजारी लाल नंदा का जीवन परिचय | Gulzarilal Nanda Biography In Hindi

गुलजारी लाल नंदा का जीवन परिचय
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दोस्तों, आज हम गुलजारी लाल नन्दा की जीवनी आपको बताएँगे. वे एक प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ थे. गुलजारी लाल नन्दा राजनीति के क्षेत्र में बहुत बड़ा नाम माना जाता है. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित गुलजारीलाल नन्दा ने दिल से देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया. इन्होने देश के कामगारों के अधिकारों केलिए कई बड़े कदम उठाये. उनका निर्मल व्यक्तित्व उनके कार्यों में ज़लकता है. तो आइये इनकी जीवनी विस्तार से समज़ते है –

गुलजारी लाल नंदा का जीवन परिचय | Gulzarilal Nanda Biography In Hindi

गुलजारी लाल नंदा का जीवन परिचय | Gulzarilal Nanda Biography In Hindi

बिंदु (Points)जानकारी (Information)
नाम (Name)गुलजारी लाल नन्दा
जन्म (Date of Birth)04/07/1898
आयु 100 वर्ष
जन्म स्थान (Birth Place)सियालकोट, पश्चिमी पाकिस्तान
पिता का नाम (Father Name)बुलाकी राम नन्दा
माता का नाम (Mother Name)ईश्वर देवी नन्दा
पत्नी का नाम (Wife Name)लक्ष्मी देवी
जाति (Cast)सेन
पेशा (Occupation )राजनेता
राजनेतिक पार्टी (Party)भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
बच्चे (Children, Son)2 पुत्र(महाराज कृष्ण मेहता, नरिंदर नंदा) और 1 पुत्री (पुष्पा नाइक)
मृत्यु (Death)15/01/1998
मृत्यु स्थान (Death Place)दिल्ली
भाई-बहन (Siblings)ज्ञात नहीं
अवार्ड (Award)भारत रत्न

आज़ाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद वे 1964 में कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए. उसके बाद बार लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 1966 में यह दूसरी बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए. इन्होने इनके पद का बाकि राजनीतियों की तरह कभी भी गलत इस्तेमाल नहीं किया.

प्रारम्भिक जीवन

गुलजारी लाल नन्दा का जन्म 4 जुलाई 1898 को सियालकोट में एक सेन परिवार में हुआ था. वर्त्तमान में सियालकोट पश्चिमी पाकिस्तान का हिस्सा है. इनके पिता का नाम बुलाकी राम नन्दा तथा माता का नाम श्रीमती ईश्वर देवी नन्दा था. उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा सियालकोट से ही पूरी की. इसके बाद उन्होंने लाहौर के ‘फ़ोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज’ तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन किया. वर्ष 1916 में इनका विवाह लक्ष्मी देवी के साथ सम्पन्न हुआ. इनकी तीन संताने थी, जिनमे दो पुत्र और एक पुत्री शामिल थे.

  • गुलज़ारी लाल नन्दा का भारत के स्वाधीनता संग्राम में योगदान रहा.
  • वर्ष 1921 में उन्होंने असहयोग आन्दोलन में भाग लिया. उन्होंने मुम्बई के नेशनल कॉलेज से व्याख्याता के रूप में कार्य किया.
  • उसके बाद अहमदाबाद की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में यह लेबर एसोसिएशन के सचिव भी रहे और वर्ष 1922 से 1946 तक का लम्बा समय इन्होंने इस पद पर गुज़ारा.
  • वे श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने केलिए हमेशा प्रयास करते रहे. उन्होंने श्रमिको के अधिकारों की मांग की.
  • 1932 में सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान और 1942-1944 में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय इन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

राजनितिक जीवन व निधन | Gulzarilal Nanda Career & Death

गुलज़ारी लाल नन्दा 1937 में बॉम्बे विधान सभा के लिए चुने गए और 1937 से 1939 तक वे बॉम्बे सरकार के संसदीय सचिव रहे. इस दौरान उन्होंने श्रम एवं आवास मंत्रालय का कार्यभार संभाला. 1947 में ‘इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ की स्थापना की गयी. उन्होंने कस्तूरबा मेमोरियल ट्रस्ट में न्यासी के रूप में, हिंदुस्तान मजदूर सेवक संघ में सचिव के रूप में तथा बाम्बे आवास बोर्ड में अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. इस ही दौरान वे राष्ट्रीय योजना समिति के सदस्य भी रहे.

वे दिल्ली में 1950-1951, 1952-1953 और 1960-1963 में भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर रहे. भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का इनका सहयोग प्राप्त हुआ. जैसे पहले ही आपको बता दिया है, वे जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद वे 1964 में कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए. उसके बाद बार लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 1966 में यह दूसरी बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए.

इन्हे 100 वर्षो की दीर्घ आयु प्राप्त हुई. गुलज़ारी लाल का निधन 15 जनवरी 1998 को दिल्ली में हुआ.

रचनाएँ

  • सम आस्पेक्ट्स ऑफ़ खादी,
  • अप्रोच टू द सेकंड फ़ाइव इयर प्लान,
  • गुरु तेगबहादुर,
  • संत एंड सेवियर,
  • हिस्ट्री ऑफ़ एडजस्टमेंट इन द अहमदाबाद टेक्सटाल्स,
  • फॉर ए मौरल रिवोल्युशन,
  • सम बेसिक कंसीड्रेशन

पुरस्कार | Gulzarilal Nanda Awards

  • भारत रत्न (1997)
  • पद्म विभूषण

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