महर्षि दयानंद सरस्वती के अमृत वचन | Maharshi Dayanand Saraswati Quotes in Hindi

आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के अमृत वचन और अनमोल विचार | Maharshi Dayanand Saraswati Quotes and Thoughts in Hindi

Quote-1
दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिये और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आएगा.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-2
नुकसान से निपटने में सबसे ज़रूरी चीज है उससे मिलने वाले सबक को ना भूलना. वो आपको सही मायने में विजेता बनाता है..

~दयानन्द सरस्वती

Quote-3
इंसान को दिया गया सबसे बड़ा संगीत यंत्र आवाज है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-4
अगर आप पर हमेशा ऊँगली उठाई जाती रहे तो आप भावनात्मक रूप से अधिक समय तक खड़े नहीं हो सकते.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-5
लोग कहते हैं कि वे समझते हैं कि मैं क्या कहता हूं और मैं सरल हूं. मैं सरल नहीं हूँ, मैं स्पष्ट हूं.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-6
लोगों को कभी भी चित्रों की पूजा नहीं करनी चाहिए, मानसिक अन्धकार का फैलाव मूर्ति पूजा के प्रचलन की वजह से है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-7
कोई मूल्य तब मूल्यवान है जब मूल्य का मूल्य स्वयं के लिए मूल्यवान हो.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-8
भगवान का ना कोई रूप है ना रंग है, वह अविनाशी और अपार है, जो भी इस दुनिया में दिखता है वह उसकी महानता का वर्णन करता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-9
सबसे उच्च कोटि की सेवा ऐसे व्यक्ति की मदद करना है जो बदले में आपको धन्यवाद कहने में असमर्थ हो.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-10
आप दूसरों को बदलना चाहते हैं ताकि आप आज़ाद रह सकें. लेकिन ये कभी ऐसे काम नहीं करता. दूसरों को स्वीकार करिए और आप मुक्त हैं.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-11
ईश्वर पूर्ण रूप से पवित्र और बुद्धिमान है. उसकी प्रकृति, गुण, और शक्तियां सभी पवित्र हैं. वह सर्वव्यापी, निराकार, अजन्मा, अपार, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिशाली, दयालु और न्याययुक्त है. वह दुनिया का रचनाकार, रक्षक, और संघारक है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-12
जो व्यक्ति सबसे कम ग्रहण करता है और सबसे अधिक योगदान देता है वह परिपक्कव है, क्योंकि जीने में ही आत्म-विकास निहित है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-13
जीवन में मृत्यु को टाला नहीं जा सकता. हर कोई ये जानता है, फिर भी अधिकतर लोग अन्दर से इसे नहीं मानते- ‘ये मेरे साथ नहीं होगा.’ इसी कारण से मृत्यु सबसे कठिन चुनौती है जिसका मनुष्य को सामना करना पड़ता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-14
गीत व्यक्ति के मर्म का आह्वान करने में मदद करता है. और बिना गीत के, मर्म को छूना मुश्किल है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-15
आत्मा अपने स्वरुप में एक है, लेकिन उसके अस्तित्व अनेक हैं.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-16
प्रबुद्ध होना- ये कोई घटना नहीं हो सकती. जो कुछ भी यहाँ है वह अद्वैत है. ये कैसे हो सकता है. यह स्पष्टता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-17
हमें पता होना चाहिए कि भाग्य भी कमाया जाता है और थोपा नहीं जाता. ऐसी कोई कृपा नहीं है जो कमाई ना गयी हो.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-18
इंसान की आत्मा परमात्मा का ही अंश होता है जिसे हम अपने कर्म से गति प्रदान करते है ,और फिर आत्मा हमारी दशा को तय करती है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-19
मुझे सत्य का पालन करना पसंद है बल्कि, मैंने औरों को उनके अपने भले के लिए सत्य से प्रेम करने और मिथ्या को त्यागने के लिए राजी करने को अपना कर्त्तव्य बना लिया है. अतः अधर्म का अंत मेरे जीवन का उदेश्य है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-20
छात्र की योग्यता ज्ञान अर्जित करने के प्रति उसके प्रेम, निर्देश पाने की उसकी इच्छा, ज्ञानी और अच्छे व्यक्तियों के प्रति सम्मान, गुरु की सेवा और उनके आदेशों का पालन करने में दिखती है. क्योंकि मनुष्यों के भीतर संवेदना है, इसलिए अगर वो उन तक नहीं पहुँचता जिन्हें देखभाल की ज़रुरत है तो वो प्राकृतिक व्यवस्था का उल्लंघन करता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-21
वर्तमान जीवन का कार्य अन्धविश्वास पर पूर्ण भरोसे से अधिक महत्त्वपूर्ण है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-22
हालांकि संगीत भाषा, संस्कृति और समय से परे है, और नोट समान होते हुए भी भारतीय संगीत अद्वितीय है क्योंकि यह विकसित है, परिष्कृत है और इसमें धुन को परिभाषित किया गया है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-23
किसी भी रूप में प्रार्थना प्रभावी है क्योंकि यह एक क्रिया है. इसलिए, इसका परिणाम होगा. यह इस ब्रह्मांड का नियम है जिसमें हम खुद को पाते हैं.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-24
मनुष्य का जन्म इस लिए होता है कि उसे पता चले कि क्या सही है और क्या गलत. न की धर्म के नाम पर लड़ने के लिए.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-25
ईश्वर पूर्ण रूप से पवित्र और बुद्धिमान है. उसकी प्रकृति, गुण, और शक्तियां सभी पवित्र हैं. वह सर्वव्यापी, निराकार, अजन्मा, अपार, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिशाली, दयालु और न्याययुक्त है. वह दुनिया का रचनाकार, रक्षक, और संघारक है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-26
वह अच्छा और बुद्धिमान है जो हमेशा सच बोलता है, धर्म के अनुसार काम करता है और दूसरों को उत्तम और प्रसन्न बनाने का प्रयास करता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-27
लोगों को भगवान को जानना और उनके कार्यों की नक़ल करनी चाहिए. पुनरावृत्ति और औपचारिकताएं किसी काम की नहीं हैं.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-28
अज्ञानी होना गलत नहीं है, अज्ञानी बने रहना गलत है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-29
अपने सामने रखने या याद करने के लिए लोगों की तस्वीरे या अन्य तरह की पिक्चर लेना ठीक है. लेकिन भगवान् की तस्वीरे और छवियाँ बनाना गलत है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-30
मोक्ष पीड़ा सहने और जन्म-मृत्यु की अधीनता से मुक्ति है, और यह भगवान की अपारता में स्वतंत्रता और प्रसन्नता का जीवन है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-31
मोह जाल की तरह होता है. इसमें जो फस गया वह पूरी तरह से उलझ जाता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-32
धन एक वस्तु है जो ईमानदारी और न्याय से कमाई जाती है. इसका विपरीत है अधर्म का खजाना.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-33
निरीह सुख सद गुणों और सही ढंग से अर्जित धन से मिलता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-34
काम करने से पहले उसके बारे में सोचना बुद्धिमानी है ,और यदि काम करते हुए उस पर सोचना सतर्कता होती है , और यदि आप काम ख़त्म करने के बाद सोचते हो तो आप मुर्ख हो

~दयानन्द सरस्वती

Quote-35
लालच वह अवगुण होता है , जो प्रत्येक दिन बढ़ता ही जाता है । जब तक इंसान का पतन नहीं हो जाता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-36
वेदों-पुराणों में जो कुछ बताया गया. उसका पान करने के बाद हम ये जान सके क़ि जिन्दगी का उद्देश्य क्या है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-37
जीह्वा को उसे व्यक्त करना चाहिए जो ह्रदय में है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-38
उपकार बुराई का अंत करता है, सदाचार की प्रथा का आरम्भ करता है, और लोक-कल्याण तथा सभ्यता में योगदान देता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-39
ईष्या से इंसानो को दूर रहना चाहिए. क्योकि ईष्या इंसान के अंदर ही अंदर जलाती है और इंसानो को उनके रास्ते से भटकाकर उन्हें नष्ट कर देती है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-40
एक इंसान को अपने नश्वर शरीर के बजाय ईश्वर से प्रेम करना चाहिए और सत्य और धर्म से प्यार करना चाहिए.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-41
किसी भी रूप में प्रार्थना प्रभावी है क्योंकि यह एक क्रिया है। इसलिए, इसका परिणाम होगा, यह इस ब्रह्मांड का नियम है जिसमें हम खुद को पाते हैं.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-42
इंसान के आचरण की नींव संस्कार होती है ,जितना गहरा इंसान का संस्कार होगा. उतना ही मजबूत उसका कर्तव्य ,धर्म ,सत्य और न्याय होगा.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-43
जब एक इंसान अपने क्रोध पर विजय हासिल कर लेता है , अपने काम को काबू में कर लेता है, ” यश “की इच्छा को त्याग देता है ,मोह माया से दूर चला जाता है. तब उसके अंदर एक अदभुत शक्तियां आ जाती है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-44
जो कभी सुबह और शाम प्रार्थना नहीं करता है वह शूद्र के रूप में बुलाया जाता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-45
कोई भी मानव हृदय सहानुभूति से वंचित नहीं है. कोई धर्म उसे सिखा-पढ़ा कर नष्ट नहीं कर सकता. कोई संस्कृति, कोई राष्ट्र कोई राष्ट्रवाद- कोई भी उसे छू नहीं सकता क्योंकि ये सहानुभूति है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-46
काम’ मनुष्य के ‘विवेक’ को भरमा कर उसे पतन के मार्ग पर ले जाता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-47
लोभ कभी समाप्त न होने वाला रोग है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-48
इन्सान का गलत काम ही उस इंसान के विवेक को भ्रामित करके उसे पतन के रास्ते पर लेकर जाता है.

~दयानन्द सरस्वती

Quote-49
जिसको परमात्मा और जीवात्मा का यथार्थ ज्ञान, जो आलस्य को छोड़कर सदा उद्योगी, सुख दुःखआदि का सहन, धर्म का नित्य सेवन करने वाला, जिसको कोई पदार्थ धर्म से छुड़ा कर अधर्म की ओर न खेंच सके वह पण्डित कहलाता है.

~दयानन्द सरस्वती

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