विज्ञान मेले का मेरा अनुभव | Experience of Vigyan Mela in Hindi

28 फरवरी को स्कूल के अन्दर आयोजित विज्ञान मेले में प्राप्त हुए अनुभव पर एक लेख | personal experience of Vigyan Mela held in the school in Hindi

दोस्तों हम सभी जानते है कि हर वर्ष 28 फरवरी को बड़ी धूम धाम से ‘विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है. इस अवसर पर कई विज्ञान से सम्बंधित मेलो का आयोजन किया जाता है. इससे जो मुझे अनुभव हुआ वो में आपको प्रस्तुत कर रही हूँ.

हर वर्ष कई स्थानों पर विज्ञान मेले का आयोजन किया जाता है इसे विद्यालय में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी आयोजित किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक द्रष्टिकोण विकसित करना है और विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रूचि जाग्रत करना है. इससे विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच बढ़ेगी और आगे आने वाले समय में ये ही बच्चे नए-नए प्रयोगों द्वारा हमारे देश को आगे ले जाएँगे.

इस मेले में कई प्रतियोगताओ का आयोजन किया गया था जैसे विद्यार्थी सेमिनार, शिक्षक सेमीनार, वाद- विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता, प्रादर्श प्रदर्शन आदि. यह विद्यार्थियों की रूचि बढाने का सबसे अच्छा माध्यम हैं. इसमें मेरे कई मित्र बढ़-चढ़ के हिस्सा ले रहे थे.

इसमें कई स्कुलो के प्रबंधक, टीचर भी मौजूद थे. विज्ञान मेले में करीब 1000 दर्शक थे. जिसमे 600 छात्र, 200 टीचर और 200 अन्य लोग होंगे. कई बच्चो ने तो विज्ञान पर मॉडल भी तैयार किये थे जिसको देखने के लिए बच्चे और लोग बहुत उत्साहित हो रहे थे.

कई स्कूलों के बच्चो ने लाइब्ररी की किताबो की मदद से विभिन्न तरह के प्रयोग भी किये थे ताकि अन्य लोग इस विषय पर आसानी से समझ सके. विद्यार्थियों ने कई रोचक विषयों पर पोस्टर भी तैयार किये थे. उनके विज्ञान के टीचर बच्चो को सभी चीजों को व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित करने में मदद भी कर रही थी. मैंने वहां यह जरुर सिखा कि नई चुनौतियों को अपने जीवन में स्वीकार कैसे किया जा सकता है.

विज्ञान मेले के अवसर पर हमे खुद चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है कि क्या करना है. आप अपने रूचि अनुसार कार्य करने में सामर्थ्य है या नहीं. जब आपको खुद चुनने के अनुमति दी जाती है तो आप उस चुने हुए काम को स्वतंत्र रूप से करने की जिम्मेदारी लेते है या नहीं. ऐसे अवसर जब बच्चों को दिए जाते है तो यह बच्चो को खुद से संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता है और यदि बार-बार गलतियाँ भी होती है तो इससे आपको कुछ सिखने को भी मिलता है. सिखने से नए नए विचार आते है और हम आसानी से किसी भी विषय पर अपने सोच-विचार को प्रस्तुत कर सकते है. नई-नई चीजे सिखने को मिलती है.

कई बार सारी चीजों के बारे में हम ऐसे ही मानकर हम कुछ गहरे विश्वास बना लेते हैं, और शायद हम इन चीजों के बारे में कभी सोचते ही नहीं कि ऐसा क्यों होता है ? पर कई बार बहुत सारी बातों को लेकर मन में ये भी सवाल आता है कि हम जो सोच रहे हैं क्या यह बिलकुल ठीक है? या कहीं हम गलत तो नहीं सोच रहे हैं? जब हम ऐसी उलझन में हो पर तब हमें क्या करना चाहिए.

छोटी उम्र के बच्चो का ध्यान रखते हुए पत्तियों से बनी आकृतियाँ, गुब्बारे व चाँद, तारे, सूरज वाले मॉडल बनाये गए थे और पानी वाले प्रयोगों भी इससे बच्चे जल्दी अधिक आकर्षित होते रहे. जबकि बड़े बच्चों ने कई प्रयोग जैसे सिक्का, पृथ्वी की संरचना, ज्वालामुखी, पानी का बवंडर, हैण्डपम्प, फव्वारा, तैरती सुई द्वारा प्रयोग किये थे. ज्वालामुखी के प्रयोग को बच्चों ने सबसे ज्यादा और बड़ी उत्सुकता के साथ देखा. कई प्रयोग बच्चो ने अकेले तो कई प्रयोग समूह द्वारा किये थे.

विज्ञान के साथ मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा. मैंने देखा कि एक छोटा बच्चा इसमें इतनी रूचि ले रहा था तो उसको देखकर मुझे कुछ सिखने की प्रेरणा मिली. मैं वहां से आने के बाद विज्ञान को व्यापक दृष्टिकोण से देखती हूं क्योकि विज्ञान का हमारे जीवन में सबसे ज्यादा महत्त्व है हर चीज के पीछे कुछ न कुछ वैज्ञानिक कारण छुपा होता है. तो हमे इन चीजों पर ध्यान जरुर देना चाहिए.

इससे हमे व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में तत्परता से काम करने की शक्ति मिलती है. इस तरह की प्रक्रियाओं से यह उम्मीद है कि हम सब विज्ञान के प्रति एक नई सोच और सीखने के लिए प्रेरित होंगे.

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