मजदूर दिवस क्यों और कैसे मनाया जाता हैं | Labour Day History and Celebration in Hindi

मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता हैं, कैसे मनाते हैं, शायरी मैसेज और कविता | Labour Day History, How it celebrates, Shayari Message and Poem in Hindi

भारत में 55 लाख महिलाएं और 2.2 करोड़ पुरुष संगठित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के श्रम का हिस्सा हैं. हर साल 1 मई को मजदूरों और मजदूर वर्गों के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस मनाया जाता है. मजदूर दिवस कई देशों में सार्वजनिक अवकाश होता है और कई यूरोपीय देशों में मई दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. श्रमिक दिवस एक विशेष दिन है जो श्रमिक वर्ग को उनकी कड़ी मेहनत और प्रयासों को पहचानने के लिए समर्पित है. यह विभिन्न देशों में दुनिया भर में मनाया जाता है. अधिकांश देशों में यह 1 मई को मनाया जाता है जो अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस होता है. श्रम दिवस का इतिहास और उत्पत्ति अलग-अलग देशों में अलग-अलग है.

मजदूर दिवस – इतिहास और उत्पत्ति (Labour Day History and Origin)

पहले के समय में मजदूरों की हालत बहुत खराब थी. उन्हें कड़ी मेहनत करने और प्रतिदिन 15 घंटे तक काम करने की आवश्यकता थी. उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और अपने कार्यस्थल पर अन्य भयानक समस्याओं का सामना करना पड़ा. उनके द्वारा कड़ी मेहनत के बावजूद इन लोगों को अल्प वेतन दिया गया, लंबे समय तक काम करने और उन समस्याओं को ठीक करने के लिए अच्छे स्रोतों की कमी के कारण इन लोगों द्वारा स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ती संख्या ने श्रमिक संघों को इस प्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई. उत्तेजित मजदूरों ने यूनियनों का गठन किया जो अपने अधिकारों के लिए काफी समय तक लड़े. इसके बाद मजदूरों और श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए 8-घंटे की कार्यकाल निर्धारित किया गया. इसे आठ घंटे के दिन के आंदोलन के रूप में भी जाना जाता है. इसके अनुसार एक व्यक्ति को केवल आठ घंटे काम करना चाहिए. उसे मनोरंजन के लिए आठ घंटे और आराम के लिए आठ घंटे मिलने चाहिए. इस आंदोलन में मजदूर दिवस का मूल है.

यद्यपि श्रम दिवस का इतिहास और उत्पत्ति अलग-अलग देशों में भिन्न है लेकिन इसके पीछे मुख्य कारण समान है और यह श्रमिक वर्ग का अनुचित व्यवहार है. यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण था कि देश के बुनियादी ढांचे के विकास में बेहद योगदान देने वाले लोगों के वर्ग के साथ खराब व्यवहार किया गया. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ विभिन्न आंदोलन हुए और यह दिन आखिरकार अस्तित्व में आया.

1 मई यानी मजदूर दिवस भारत में एक सार्वजनिक अवकाश है. श्रम दिवस ​​समारोह, प्रदर्शन और शिविर देश के कई हिस्सों में आयोजित किए जाते हैं. देश में पहला श्रम दिवस समारोह 1 मई 1923 को मद्रास (चेन्नई) में आयोजित किया गया था. मलयपुरम सिंगारवेलु चेट्टियार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से एक और श्रमिकों के अधिकारों के नेता थे. उन्होंने लेबर किसान पार्टी का शुभारंभ किया. उन्होंने उस दिन मद्रास में दो कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की थी. एक को मरीना समुद्र तट पर मद्रास उच्च न्यायालय के सामने और दूसरे को ट्रिप्लिकेन में आयोजित किया गया था. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस दिन एक राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा करनी चाहिए. लाल झंडा जो लोकप्रिय रूप से श्रमिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, इस दिन भारत में पहली बार उठाया गया था. लेबर स्टैच्यू (जिसे ट्राइंफ ऑफ़ लेबर कहा जाता है) को श्रम की विजय के रूप में चेन्नई के मरीना बीच पर बनाया गया है. जो देश में पहले मजदूर दिवस समारोह का एक भव्य अनुस्मारक है.

Labour Day History and Celebration in Hindi

भारत में मजदूर दिवस का उत्सव (Celebration of Labour Day in India)

जिस तरह दुनिया के विभिन्न अन्य हिस्सों में मजदूर दिवस भारत में मजदूर वर्ग के लोगों के लिए भी उत्सव का दिन है. इस दिन किसी भी संगठन द्वारा मजदूरों के खिलाफ किए जा रहे अन्यायपूर्ण व्यवहार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाता है. यह प्रदर्शित करने के लिए भी जुलूस निकाले जाते हैं कि मजदूर एकजुट रहें और पूँजीपतियों की किसी भी अनुचित माँग को बर्दाश्त नहीं करेंगे. मजदूरों के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख नेताओं द्वारा भाषण दिए जाते हैं. श्रमिक संघ पिकनिक और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का भी संचालन करते हैं.

मजदूर दिवस पर शायरी मैसेज (Labour Day Shayari Message)

मैं मजदूर हूँ मजबूर नहीं
यह कहने मैं मुझे शर्म नहीं
अपने पसीने की खाता हूँ
मैं मिट्टी को सोना बनाता हूँ


हर कोई यहाँ मजदूर हैं
चाहे पहने सूट बूट या मैला
मेहनत करके कमाता हैं
कोई सैकड़ा कोई देहला
हर कोई मजदूर ही कहलाता हैं
चाहे अनपढ़ या पढ़ा लिखा


सफलता के मार्ग में योगदान अनमोल हैं
चाहे हो मालिक या कोई नौकर
कोई ईकाई तुच्छ नहीं
सबका अपना मान हैं
कहने को एक छोटा लेबर ही सही
पर उसी को रास्ते का ज्ञान हैं
घमंड ना करना इस ऊंचाई का कभी
तेरे कंधो पर इनके पसीने का भार हैं


मजदूर ऊँचाई की नींव हैं
गहराई में हैं पर अंधकार में क्यूँ
उसे तुच्छ ना समझाना
वो देश का गुरुर हैं


हर इमारत की नींव हैं
अमीरों की तक़दीर हैं
खून पसीना बहाकर अपना
पूरा करते वो अमीरों का सपना
दो वक्त की उसे मिले ना मिले
पर उसी के हाथो करोड़ो की तक़दीर लिखे
माना उसकी किस्मत हैं
अभी नहीं हैं एशो आराम
पर उसको ना भुलाना तुम
ना बनाना बैगाना तुम
देना उसे उसका हक़
मजदूर हैं वह मेहनती शख्स


मेहनत उसकी लाठी हैं
मजबूती उसकी काठी हैं
बुलंदी नहीं पर नीव हैं
यही मजदूरी जीव हैं.


जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा
वो भारत माँ का बेटा कौन
जिसने पसीने से भूमि को सींचा
वो भारत माँ का बेटा कौन
वह किसी का गुलाम नहीं
अपने दम पर जीता हैं
सफलता का एक कण ही सही
लेकिन हैं अनमोल जो मजदूर कहलाता हैं..

Labour Day History and Celebration in Hindi

मजदूर पर कुछ कविताएँ (Labour Day Poems)

पत्थर तोड़ रहा मजदूर
पत्थर तोड़ रहा मजदूर
थक के मेहनत से है चूर
फिर भी करता जाता काम
श्रम की महिमा है मशहूर
मेहनत से न पीछे रहता
कभी काम से न ये डरता
पर्बत काट बनाता राह
नव निर्माण श्रमिक है करता
नदियों पर ये बांध बनाता
रेल पटरियां यही बिछाता
श्रम की शक्ति से मजदूर
कल कारखाने भवन बनाता
खेत में करता मेहनत पूरी
पाता है किसान मजदूरी
कतराता जो भी है श्रम से
उसे घेरती है मज़बूरी

~ हरजीत निषाद


“मैं एक मजदूर हूँ”
मैं एक मजदूर हूँ, ईश्वर की आंखों से मैं दूर हूँ।
छत खुला आकाश है, हो रहा वज्रपात है।
फिर भी नित दिन मैं, गाता राम धुन हूं।
गुरु हथौड़ा हाथ में, कर रहा प्रहार है।
सामने पड़ा हुआ, बच्चा कराह रहा है।
फिर भी अपने में मगन, कर्म में तल्लीन हूँ।
मैं एक मजदूर हूँ, भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ।
आत्मसंतोष को मैंने, जीवन का लक्ष्य बनाया।
चिथड़े-फटे कपड़ों में, सूट पहनने का सुख पाया
मानवता जीवन को, सुख-दुख का संगीत है।
मैं एक मजदूर हूँ, भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ।

~ राकेशधर द्विवेदी


“जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा”
जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा
वो भारत माँ का बेटा कौन।
जिसने पसीने से भूमि को सींचा
वो भारत माँ का बेटा कौन।
वह किसी का गुलाम नहीं
अपने दम पर जीता हैं।
सफलता एक एक कण ही सही
लेकिन है अनमोल जो मज़दूर कहलाता हैं।


मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
मेहनत के बदले दो वक़्त की रोटी पाना
पढ़ा लिखाकर अपने बच्चो को
ऊँचे पदों पर पहुचाना चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
बंगले गाड़ी का शौक नहीं
एक छोटी सी कुटिया और
परिवार के साथ जीना चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
देश की उन्नति
राज्य की प्रगति
और गाँव की समृध्दी चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
न हो भारत में कोई निर्धन
न हो किसी की भुखमरी से मौत
न हो कोई बेरोजगारी चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु


“मज़दूर दिवस है”
दुनिया जगर-मगर है कि मज़दूर दिवस है
दुनिया जगर-मगर है कि मज़दूर दिवस है
चर्चा इधर-उधर है कि मज़दूर दिवस है
मालिक तो फ़ायदे की क़वायद में लगे हैं
उन पर नहीं असर है कि मज़दूर दिवस है
ऐलान तो हुआ था कि घर इनको मिलेंगे
अब भी अगर-मगर है कि मज़दूर दिवस है
साधन नहीं है कोई भी, भरने हैं कई पेट
इक टोकरी है, सर है कि मज़दूर दिवस है
हाथों में फावड़े हैं ‘यती’ रोज़ की तरह
उनको कहाँ ख़बर है कि मज़दूर दिवस है

~ ओमप्रकाश यती


“मैं मजदूर हूँ।”
किस्मत से मजबूर हूँ।
सपनों के आसमान में जीता हूँ,
उम्मीदों के आँगन को सींचता हूँ।
दो वक्त की रोटी खानें के लिये,
अपने स्वभिमान को नहीँ बेचता हूँ।
तन को ढकने के लिये
फटा पुराना लिबास है।
कंधों पर जिम्मेदारीहै
जिसका मुझे अहसास है।
खुला आकाश है छत मेरा
बिछौना मेरा धरती है।
घास-फूस के झोपड़ी में
सिमटी अपनी हस्ती है।
गुजर रहा जीवन अभावों में,
जो दिख रहा प्रत्यक्ष है।
आत्मसंतोष ही मेरे
जीवन का लक्ष्य है।
गरीबी और लाचारी से जूझ
जूझकर हँसना भूल चुका हूँ।
अनगिनत तनावों से लदा हुआ,
आँसू पीकर मजबूत बना हूँ।

~ कंचन कृतिका


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