3D प्रिंटिंग क्या है ? और ये कैसे काम करती है ? | Will 3D Printing Ever Rule the World ?

3D प्रिंटिंग क्या है ? और ये कैसे काम करती है ?
What is 3D Printing and How Do 3D Printers Work in Hindi

ऐसा लगता है कि अमेरिका के व्हाइट हाउस से लेकर दिल्ली की लोकसभा तक हर कोई आजकल इन दिनों 3 डी प्रिंटिंग के बारे में बात कर रहा है, लेकिन असलियत मे ये 3 डी प्रिंटिंग है क्या ? और कैसे काम करता है ? और क्यों इतना प्रचलित है? आइए जानते है, इसके बारे मे विस्तार से…

3 डी प्रिंटिंग क्या है | What is 3D printing in Hindi ?

ये कहना गलत नहीं होगा कि 3 डी प्रिंटर मशीनों की एक नई पीढ़ी है या यूं कहे कि मशीनों का अपडेट वर्ज़न है जिससे हम रोजमर्रा की चीजें बना सकते हैं. ये बहुत खास पीढ़ी है, क्योंकि यहाँ एक ही मशीन से, अलग-अलग सामग्रियों का , विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन किया जा सकता हैं.

3डी प्रिंटिंग की परिभाषा | 3d printing definition

अगर सीधे शब्दों मे कहें तो “3 डी प्रिंटिंग एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमे एक डिजिटल फाइल के द्वारा तीन डाईमेंशन वाले सॉलिड ऑब्जेक्ट को तैयार किया जाता है, अगर सीधे शब्दों मे कहें तो ” 3 डी प्रिंटिंग एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमे एक डिजिटल फाइल के द्वारा तीन आयाम (3 डी) वाली ठोस वस्तु को बनाया जाता है”.

एक 3 डी प्रिंटर सिरेमिक कप से लेकर प्लास्टिक के खिलौने, मेटल मशीन पार्ट्स, पत्थर का फूलदान, फैंसी चॉकलेट केक या यहां तक ​​कि मानव शरीर के अंगों के लिए भी बहुत कुछ बना सकता है. 3 डी प्रिंटिंग मे बहुत कठिन आकार वाली वाली वस्तुओं को भी बनाया जा सकता है जो आजकल की पारंपरिक निर्माण विधि से कर पाना बहुत मुश्किल है.

अब लोग पारंपरिक कारखाने उत्पादन लाइनों को एक मशीन से बदल रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे घर में इंकजेट प्रिंटर की जगह स्याही की बोतलें, एक प्रिंटिंग प्रेस, गर्म धातु के प्रकार होता है.

इसे प्रिंटिंग क्यों कहा जाता है? | Why is it called printing?

हम जब इस मशीन से कुछ बनाने की बात करते है तो दिमाग मे एक सवाल आता है कि, इसे प्रिंटिंग क्यों कहा जाता है ? चलिए समझते है.

यदि आप अपने घर पर रखे प्रिंटर से कागज पर प्रिंट किए गए किसी टेक्स्ट को बारीकी से (माइक्रोस्कोप के साथ) देखते हैं, तो आप देखेंगे कि पेपर पर शब्द केवल धब्बा नहीं देते हैं, वे वास्तव में पेपर की सतह के ऊपर थोड़ा बैठे हुए से प्रतीत होते हैं.

प्रिंटर का सिद्धांत कहता है, यदि आप उसी पेपर पर कुछ हज़ार बार प्रिंट करते हैं, तो अंततः स्याही प्रत्येक अक्षर के एक ठोस 3D मॉडल को बनाने के लिए एक दूसरे के ऊपर पर्याप्त परतें बनाएगी. इन छोटी परतों से एक विचार ने जन्म लिया और भौतिक रूप मे हमारे सामने आया और बताया कि 3 डी प्रिंटर ऐसे काम करता है. यही वजह है इसे प्रिंटर कहने की.

3 डी प्रिंटर कैसे काम करता है | How do 3D printer work

आप इसकी शुरुआत मे एक साधारण होम कंप्युटर पर एक 3 डी ऑब्जेक्ट डिज़ाइन करके शुरू करते हैं, फिर पीसी को एक 3 डी प्रिंटर से कनेक्ट करते हैं, फिर ‘प्रिंट’ बटन दबाते हैं, बस हो गया अब आपको सिर्फ 3 डी ऑब्जेक्ट बनने तक इंतजार करना है और इस प्रक्रिया को देखना है. इसकी प्रक्रिया कुछ ऐसी ही है जैसे कटे हुए पाव के ब्रेड को बनाया जाता है, बस इसके रीवर्स मे समझिए.

मान लीजिए कटे हुए प्रत्येक ब्रेड को अलग-अलग बेकिंग किया गया और फिर उन सबको एक साथ लाकर जोड़ कर एक पाव बना दिया(जैसा की हर बेकर इस प्रक्रिया के उलट ब्रेड बनाने के लिए करता है). बस कुछ ऐसे ही सामान्यतः 3 डी प्रिंटर काम करता है.

3 डी प्रिंटिंग प्रक्रिया पूरी डिज़ाइन वस्तु को हजारों छोटे-छोटे स्लाइस में बदल देती है, फिर इसे नीचे से ऊपर की ओर, एक स्लाइस से दूसरी स्लाइस बनाती है. उसके बाद ये छोटी लेयर्स आपस मे चिपक कर एक सॉलिड वस्तु का निर्माण करती है. इसकी हर लेयर बहुत जटिल होती है, इसका मतलब है 3 डी प्रिंटर चलने वाले पार्ट्स भी बना सकता है, जो एक ही ऑब्जेक्ट के हिस्से जैसे हिंजस, पहिये. आप इस तरह एक पूरी बाइक प्रिंट कर सकते हैं. हैंडलबार, काठी, फ्रेम, पहिए, ब्रेक, पैडल और चेन बिना किसी टूल के मदद के इकट्ठे तैयार कर सकते है.

3 डी प्रिंटिंग मे इस्तेमाल किये जाने वाले मटेरियल | What type of material is used in 3D printing

इसमे मुख्य रूप से 6 प्रकार के मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है.

  • पॉलीमर्स
  • मेटल
  • कान्क्रीट
  • मेटल
  • कान्क्रीट
  • सेरामिक्स

3 डी प्रिंटिंग का क्या भविष्य है | What is the future of 3D printing

क्या आपने कभी किसी चीज़ को तोड़ा है, जिसे फिर से ढूंढकर खरीदना मुश्किल है या फिर उसे किसी ओर चीज से बदलना मुश्किल है, यहीं से 3 डी प्रिंटिंग का काम शुरू होता है, जिससे आप एक नया प्रिंट कर सकते हैं. ये वह दुनिया, जहां आप घर पर लगभग कुछ भी बना सकते हैं, आज हम जिस जीवन में रहते हैं, यह उससे बहुत अलग है. यह एक ऐसी दुनिया है जिसमें सामानों या गोदामों को सामान वितरित करने के लिए लॉरियों की आवश्यकता नहीं होती है, जहां कुछ भी कभी भी स्टॉक से बाहर नहीं होता है और जहां कम अपशिष्ट, पैकेजिंग और प्रदूषण होता है.

यह एक ऐसी दुनिया है जहाँ रोजमर्रा की चीज़ें आपकी आवश्यकताओं के अनुसार बनाई जाती हैं. इसका मतलब है कि आपके घर को सुंदर बनाने के लिए बनाया गया फर्नीचर, आपके पैरों मे फिट आने के लिए बने जूते, आपके हाथ मे फिट आने के लिए बनाए गए दरवाज़े के हैंडल, एक बटन के स्पर्श में आपकी पसंद का बनाया गया भोजन. यहां तक ​​कि दवाओं, हड्डियों, अंगों और त्वचा को आपके इलाज के लिए बनाया गया है.

यदि आप अमीर हैं, तो आप ईनमें से कुछ चीजें अपनी पसंद से प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन 3 डी प्रिंटिंग आम लोगों के लिए सस्ती, बेहतर वस्तुएं बनाता है. यदि आपको ये सब एक कल्पना लगता है कि ये सब 3 डी प्रिंटर से ही बनाया जा रहा है, तो आपको गूगल पर एक बार ये(personalised 3D printed products) जरूर सर्च करना चाहिए, उसके बाद आप खुद समझ जाएंगे इसकी ताकत.

3 डी प्रिंटिंग के फायदे | Benefits of 3D printing

  • 3 डी प्रिंटिंग आपको सस्ती और सुंदर वस्तु बनाकर दे सकता है वो भी कठिन आकार वाली, जो कोई ओर मशीन नहीं दे सकती.
  • इसमे कॉम्प्लेक्स चीजों के पार्ट को बनाने की कीमत बहुत कम पड़ती है. जो परंपरागत तरीकों से मुकाबले काफी सस्ता है.
  • 3 डी प्रिंटिंग मे कोई स्पेशलाइज़ टूलिंग की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इसमे कोई स्टार्टप कीमत नहीं चुकनी होती. 3 डी प्रिंटेड पार्ट कीमत सिर्फ मटेरियल की कीमत और उसे प्रिंट करने मे लगा समय पर निर्भर करती है.
  • इसमे बड़ी आसानी से आपकी पसंदीदा जरूरत के अनुसार वस्तु को बनाया जा सकता है.
  • ये काफी तेज है, जो काम अन्य मशीनों से करने मे 8 से 10 महीने लगते है वही काम 3 डी प्रिंटर 8 से 10 हफ्ते मे कर सकता है.
  • लार्ज रेंज का होना, यानि एक अलग मटेरियल के लिए 3 डी प्रिंटर के पास एक अलग रेंज है, जो हमे अलग अलग प्रॉपर्टी वाली वस्तुएं प्रदान करता है.

3 डी प्रिंटर की मर्यादाएं | Limitations of 3D printing

हालाँकि फ़ैक्टरी स्थापित करने की तुलना में 3D प्रिंटर खरीदना बहुत सस्ता है, लेकिन आपके द्वारा उत्पादित प्रति आइटम की लागत अधिक होगी. इसलिए 3D प्रिंटिंग का अर्थशास्त्र अभी तक पारंपरिक बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं करता है. यह औद्योगिक मशीनों के स्मूथ फिनिश से मेल नहीं खा सकता है, और न ही औद्योगिक प्रक्रियाओं की तरह मटेरियल की वेराईटी या रेंज की साइज़ दे सकता है. लेकिन, कई घरेलू तकनीकों की तरह, इसकी भी कीमतें कम हो जाएंगी और समय के साथ 3 डी प्रिंटर क्षमताओं में सुधार जरूर देखने को मिलेगा. चलिए इसे ऐसे समझिए

  • 3 डी प्रिंटेड पार्ट की फिज़िकल प्रॉपर्टी इतनी अच्छी नहीं होती, क्योंकि इन्हे एक लेयर बाय लेयर बनाया जाता है इसलिए ये दूसरों के मुकाबले कमजोर होते है.
  • बड़े पैमाने पर 3 डी प्रिंटिंग परंपरागत मशीनों से तुलना नहीं कर सकती.
  • जब परफेक्ट ठीक पार्ट बनाने की बारी आती है तो इसमे 3 डी मशीन कारगर नहीं है . इसमे बनाए गए पार्ट्स की एक्यूरेसी ठीक नहीं होती.

क्या इससे एक क्रांति ला सकते है ? | Is it the next big thing?

जी हाँ, यदि आप एक प्रोडक्ट डिजाइनर या इंजीनियर है. लेकिन, यह सभी नई तकनीकों की तरह अभी उपभोक्ताओं की सोच से कुछ साल आगे है. यह एक उभरती हुई तकनीक है, जिसका अर्थ है, यह हमारे कंप्युटर ओर मोबाईल फोन की तरह है, लोग अबतक इसी उलझन मे है कि हम कब इन चीजों के आदी हो गए.

 

दोस्तों आपको हमारा ये लेख What is 3D Printing and How Do 3D Printers Work in Hindi कैसा लगा ओर इससे जुड़े सवाल हमें कमेन्ट बॉक्स मे जरूर बताइएगा.

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