भौमवती अमावस्या का महत्व और पूजा विधि | Bhomvati Amavasya Ka mahatva aur Puja Vidhi in Hindi

भौमवती अमावस्या क्या होती हैं, इसका महत्व और पूजन विधि | Bhomvati Amavasya Ka mahatva aur Puja Vidhi in Hindi

हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष के प्रत्येक माह में एक अमावस्या आती हैं. जिस प्रकार सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं उसी प्रकार मंगलवार के दिन आने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता हैं. इस अमावस्या का हमारे धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व हैं. इस अमावस्या पर भगवान शिव और विष्णु की पूजा की जाती हैं. मंगलवार के दिन आने के कारण हनुमान जी और मंगल देव की भी पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती हैं.

भौमवती अमावस्या तिथि और समय (Bhomvati Amavasya Dates and Timing)

तारीख (Date) वार (Day) शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
02 जुलाई मंगलवार सुबह 04:57 – 06:58 तक
26 नवंबर मंगलवार रात 11:57 – सुबह 08:41

भौमवती अमावस्या का महत्व (Significance of Bhomvati Amavasya)

ग्रहों शान्ति

भौमवती अमावस्या को मंगलवारी अमावस्या और भोम्य अमावस्या नाम से भी पुकारा हैं. इस दिन पितरों का पूजन-अर्चन करने से व्यक्ति के सभी पितृ दोष और पितृ ऋण समाप्त हो जाते हैं. इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और पिंड दान तथा दान देने का विशेष महत्व हैं. इससे पितरों को शांति प्राप्त होती हैं.

जन्म राशि

भौमवती अमावस्या की किसी भी राशी पर बंदिश नहीं हैं. सभी राशी वाले व्यक्ति इस दिन पितरों का पूजन कर सकते हैं.

सौदर्य

इस अमावस्या पर पूजन करने से सभी प्रकार के सौंदर्य की प्राप्ति होती है

धन और समृधि

इस दिन मंगल देवता की उपासना करने का विशेष महत्व हैं इस दिन पूजा करने से मनुष्य पितृ दोष से मुक्त हो जाता हैं. जो लोग कर्ज, ऋण आदि से निरंतर परेशान रहते हैं, उन्हें इस दिन हनुमानजी की आराधना विशेष तौर पर करना चाहिए. जिससे उन्हें धन, सुख और वैभव की प्राप्ति होती हैं, शारीरिक रोगों से मुक्त हो जाता हैं, नौकरी और व्यवसाय में सफलता अर्जित होती हैं.

शादी और प्यार

इस दिन पूजा और दान करने से परिवारिक जीवन के उन्नति और प्यार में सफलता प्राप्त होती हैं.

भौमवती अमावस्या की पूजा विधि (Bhomvati Amavasya Ki Puja Vidhi)

  • इस दिन 108 बार ‘ॐ पितृभ्य: नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए. जो पितरों को शांति प्रदान करता हैं.
  • भौमवती अमावस्या के दिन सूर्य देवता को तांबे के लोटे में शुद्ध जल, गंगा जल और लाल चंदन मिलाकर ‘ॐ पितृभ्य: नम:’ का बीज मंत्र पढ़ते हुए तीन बार अर्घ्य देना अत्यंत फलदायी माना गया है.
  • भौमवती अमावस्या के दिन लोगों को उपवास रखते हुए भी देखा जा सकता हैं ऐसी मान्यता हैं कि इस दिन उपवास रखने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती हैं.
  • इस दिन पितरों का ध्यान करते हुए पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें.
  • अमावस्या को दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करना चाहिए.
  • कर्ज मुक्ति दिलाने वाले ऋणमोचक मंगल स्रोत का पाठ स्वयं करें या किसी युवा ब्राह्मण सन्यासी से कराएं और सुने.
  • यदि घर में कोई रोग से पीड़ित हैं तो इस दिन गुड़ व आटा दान करें. वह सभी रोगों दूर हो जायेंगे.
  • इस दिन पितृसूक्त तथा पितृस्तोत्र का पाठ करना चाहिए.
  • विद्यार्थियों को इस दिन रेवड़ी को मीठे जल में प्रवाहित करना चाहिए, इससे उन्हें शुभ परिणाम की प्राप्ति होगी.
  • गृह क्लेश से मुक्ति के लिए नदी में लाल मसूर बहायें.

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Shashank Sharma

Shashank Sharma

शशांक दिल से देशी वेबसाइट के कंटेंट हेड और SEO एक्सपर्ट हैं और कभी कभी इतिहास से जुडी जानकारी पर लिखना पसंद करते हैं.

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