शाकम्भरी पूर्णिमा का महत्व, कथा और शुभ मुहूर्त | Shakambari Purnima Mahatva, Story and Timings in Hindi

शाकम्भरी पूर्णिमा और नवरात्री का महत्व, कथा, और शुभ मुहूर्त | Shakambari Purnima or Navratri Mahatva, Story and Timings in Hindi

पौष माह में आने वाले पूर्णिमा को शाकम्भरी पूर्णिमा या पौष पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता हैं. इस दिन का एक अन्य नाम शाकम्भरी जयंती भी हैं. इस दिन शाकम्भरी देवी की पूजा विधि विधान के साथ की जाती हैं. यह शाकम्भरी नवरात्री के आखिरी दिन मनाई जाती हैं. इस वर्ष शाकम्भरी पूर्णिमा 21 जनवरी को सोमवार के दिन मनाई जाएगी.

शाकम्भरी पूर्णिमा शुभ मुहूर्त समय (Shakambari Purnima Shub Muhurat Timings)

त्यौहार नाम (Festival Name) शाकम्भरी पूर्णिमा
अन्य नाम (Other Name) बनाषणकरी देवी जयंती, शाकम्भरी जयंती
तारीख (Date) 21 जनवरी
वार (Day) सोमवार
पूर्णिमा तिथि (शुरुआत) 20 जून 2019 को अपराह्न 2:19 बजे से
पूर्णिमा तिथि (समाप्त) 21 जून 2019 को पूर्वाहन 10:45 बजे तक

शाकम्भरी नवरात्रि (Shakambari Navratri)

पौष माह में आने वाली नवरात्री को शाकम्भरी नवरात्री के नाम से जाना जाता हैं. अन्य नवरात्री प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी को समाप्त होती हैं लेकिन शाकम्भरी नवरात्री अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा पर समाप्त होती हैं. पौष माह की अष्टमी को बनाडा अष्टमी (Banada Ashtami or Banadashtami) भी कहा जाता हैं.

अन्य नवरात्री नौ दिन तक मनाई जाती हैं लेकिन यह नवरात्री केवल आठ दिन की होती हैं. कभी कभी तिथि के जोड़-घटाव के कारण शाकम्भरी नवरात्रि सात या नौ दिन की भी हो जाती हैं.

राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में शाकम्भरी नवरात्री को मनाया जाता हैं. दक्षिण भारत में शाकम्भरी माता को बनाषणकरी देवी भी कहते हैं. इस नवरात्रि में बनाडा अष्टमी और शाकम्भरी पूर्णिमा दो मुख्य दिन होते हैं.

Shakambari Purnima Mahatva, Story and Timings in Hindi

शाकम्भरी माता का कथा (Shakambari Story)

शाकम्भरी, माता पार्वती का ही एक रूप हैं. शाकम्भरी नाम दो शब्दों शाकं और भरी से मिलकर बना हैं जिसका अर्थ हरियाली की देवी होता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि प्राचीन काल में इतना भयंकर अकाल पड़ा पड़ा था की सौ वर्षों तक वर्षा नहीं हुई थी. पानी के सभी स्त्रोत नदियाँ, झीले, तालाब और कुएँ सुख गए थे. पानी के अकाल से सभी पेड़-पौधे नष्ट हो गए. मनुष्य, जीव-जंतु के पास खाना समाप्त हो गया.

इस विप्पति के समय सभी ऋषि मुनि के साथ मिलकर देवी की आराधना करने लगे. भक्तों की पुकार सुनकर देवी पार्वती प्रकट हुई और शाकम्भरी के रूप में अवतार लिया. शाकम्भरी के अवतार के साथ ही धरती वर्षा जल से सराबोर हो गयी. चारों और हरियाली छा गई. देवी के इस अवतार को शाकम्भरी देवी के नाम से पूजा जाता हैं. और पौष माह की पूर्णिमा को शाकम्भरी देवी अवतार दिवस, शाकम्भरी जयंती के रूप में मनाया जाता हैं.

माँ शाकंभरी के देश मे अनेक सिद्धपीठ है. जिनमे से शाकंभरी माता के तीन प्रमुख शक्तिपीठ हैं पहला प्रमुख राजस्थान से सीकर जिले में उदयपुर वाटी के पास सकराय माताजी के नाम से स्थित है. दूसरा स्थान राजस्थान में ही सांभर जिले के समीप शाकंभर के नाम से स्थित है और तीसरा स्थान उत्तरप्रदेश के मेरठ के पास सहारनपुर में 40 किलोमीटर की दूर पर स्थित है. माँ शाकंभरी भगवती का अति पावन प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ शिवालिक पर्वतमाला के जंगलों में एक बरसाती नदी के किनारे है.

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