एनी बेसेंट का जीवन परिचय | Annie Besant Biography in Hindi

एनी बेसेंट की जीवनी (जन्म, शिक्षा, मृत्यु) और स्वतंत्रता में योगदान | Annie Besant Biography (Birth, Education, Death) and Role in Independance in Hindi

हम बात कर रहे है महान एनी वुड बेसेंट की जो हिन्दू धर्म से बहुत प्रभावित थी. उन्हें विमेंस राइट्स एक्टिविस्ट के रूप में जाना जाता था. वे भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन की प्रमुख नेता भी थी. जोर्ज बर्नार्ड शॉ के अनुसार वे उनके समय की सबसे महानतम महिला वक्ता थी.

बेसेंट दृढ़ता से स्वीकारती थी कि इसाई मिशनरियों द्वारा भारत के धर्म संस्कृति को शिकार बनाया गया है. और वह भारतीयों को उनके भगवान्, उनका आत्म सम्मान और धर्म के प्रति गौरव की भावना जगाना चाहती थी.

बिंदु(Points) जानकारी (Information)
नाम (Name) डॉ. एनी बेसेंट
अन्य नाम (other Name) आयरन लेडी
जन्म (Birth) 1 अक्टूबर 1847
मृत्यु (Death) 20 सितम्बर 1933
जन्म स्थान (Birth Place) ‎लंदन, इंग्लैंड
कार्यक्षेत्र (Profession) समाजसेवी, लेखिका और स्वतंत्रता सेनानी
पति का नाम (Husband Name) रेवेरेंड फ्रैंक बेसेंट (पादरी)

डॉ. एनी बेसेंट की जीवनी (Annie Besant Biography)

डॉ एनी बेसेन्ट (1 अक्टूबर 1847 – 20 सितम्बर 1933) अग्रणी आध्यात्मिक, महिला अधिकारों की समर्थक, थियोसोफिस्ट, लेखक, वक्ता एवं भारत-प्रेमी महिला थीं. सन 1917 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा भी बनीं.

बेसेन्ट का जन्म लन्दन शहर में 1847 में हुआ. बेसेन्ट के ऊपर इनके माता पिता के धार्मिक विचारों का गहरा प्रभाव था. अपने पिता की मृत्यु के समय डॉ॰ मात्र पाँच वर्ष की थी. पिता की मृत्यु के बाद धनाभाव के कारण इनकी माता इन्हें हैरो ले गई. वहाँ मिस मेरियट के सानिध्य में इन्होंने शिक्षा प्राप्त की. मिस मेरियट इन्हें अल्पायु में ही फ्रांस तथा जर्मनी ले गई तथा उन देशों की भाषा सीखीं. 17 वर्ष की आयु में अपनी माँ के पास वापस आ गईं.

युवावस्था में इनका परिचय एक युवा पादरी से हुआ और 1867 में उसी रेवरेण्ड फ्रैंक से एनी बुड का विवाह भी हो गया. पति के विचारों से असमानता के कारण दाम्पत्य जीवन सुखमय नहीं रहा. 1870 तक वे दो बच्चों की माँ बन चुकी थीं. ईश्वर, बाइबिल और ईसाई धर्म पर से उनकी आस्था डिग गई. पादरी-पति और पत्नी का परस्पर निर्वाह कठिन हो गया और अंततः 1874 में उनका सम्बन्ध टूट गया. सम्बन्ध टूटने के बाद एनी बेसेन्ट को गम्भीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और उन्हें स्वतंत्र विचार सम्बन्धी लेख लिखकर धन कमाना पड़ा.

डॉ॰ बेसेन्ट इसी समय चार्ल्स व्रेडला के सम्पर्क में आई. अब वह सन्देहवादी के स्थान पर ईश्वरवादी हो गई. कानून की सहायता से उनके पति दोनों बच्चों को प्राप्त करने में सफल हो गये. इस घटना से उन्हें हार्दिक कष्ट हुआ.

यह अत्यन्त अमानवीय कानून है जो बच्चों को उनकी माँ से अलग करवा दिया है. मैं अपने दु:खों का निवारण दूसरों के दु:खों को दूर करके करुंगी और सब अनाथ एवं असहाय बच्चों की माँ बनूंगी.

~डॉ॰ बेसेन्ट

उन्होंने ब्रिटेन के कानून की निन्दा करते हुए कहा, डॉ॰ बेसेन्ट कथन को सत्य करते हुए अपना अधिकांश जीवन दीन हीन अनाथों की सेवा में ही व्यतीत किया.

हिंदुत्व के बारे में उनका कहना था कि:

विश्व के महान धर्मों का कुछ 40 वर्षों तक अध्ययन करने के बाद मैंने पाया कि कोई भी धर्म हिन्दू धर्म की तरह ना तो उत्तम है, ना ही बहुत वैज्ञानिक है, ना ही आध्यात्मिक है, और ना ही उसका दर्शन श्रेष्ठ है. आप जितना अधिक हिन्दू धर्म को जानेंगे आप ओर अधिक उसे प्यार करेंगे, आप जितना समझने की कोशिश करेंगे उतना ही उसके मूल्यों को गहराई तक जानेंगे. बगैर हिंदुत्व के भारत का कोई भविष्य नहीं है.

हिंदुत्व एक मिट्टी है जिसमें भारत रूपी जड़े अन्दर तक जुड़ी है, अगर मिट्टी सुख जाएगी तो जड़े कमजोर हो जाएगी और अपने स्थान से उखड जाएगी. भारत में कई धर्म पनप रहे है लेकिन किसी धर्म का भूतकाल ऐसा नहीं है जिसने भारत की जड़ो को इतना मजबूत किया हो. सभी धर्म जैसे आये वैसे ही चले गए लेकिन भारत आज भी बना हुआ है. यदि हिन्दू हिंदुत्व को बनाये नहीं रखता है तो कौन उसे बचाएगा? यदि भारत के बच्चे स्वयं भारत पर विश्वास नहीं करेंगे तो कौन भारत की रक्षा करेगा? भारत ही भारत को बचा सकता है और भारत और हिंदुत्व एक है.

एनी बेसेंट पर बनी डाक्यूमेंट्री (Annie Besant Documentary)

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