रस्किन बॉन्ड का जीवन परिचय | Biography of Ruskin Bond in Hindi

रस्किन बॉन्ड की जीवनी, परिवार, करियर, किताबें और उपलब्धियां | Ruskin Bond Biography, Family, Career, Books and Achievements in Hindi

रस्किन बॉन्ड ब्रिटिश मूल के एक विजेता भारतीय लेखक हैं, जो भारत में बच्चों के साहित्य को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं. उन्होंने 500 से अधिक लघु कथाएँ, निबंध और उपन्यास लिखे हैं. उनका लोकप्रिय उपन्यास ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ हैं उसी नाम की एक हिंदी फिल्म भी बनाई गयी थी. जिसे 2007 में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. रस्किन बॉन्ड बच्चों के लिए 50 से अधिक पुस्तकों और आत्मकथा के दो खंड के लेखक भी हैं. एक ब्रिटिश जोड़े के बेटे के रूप में जन्मे जब भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था. उन्होंने अपना प्रारंभिक बचपन जामनगर और शिमला में बिताया.

बिंदु (Points) जानकारी (Information)
पूरा नाम (Full Name) रस्किन बॉन्ड
जन्म तारीख (Date of Birth) 19 मई 1934
शिक्षा और स्कूल (Education and School) बिशप कॉटन स्कूल से स्नातक
वैवाहिक स्थिति (Marital Status) अविवाहित
पिता का नाम (Father Name)ऑब्रे क्लार्क (ब्रिटिश वायु सेना के कर्मचारी)
हेरि (सौतेले पिता)
माता का नाम (Mother Name)एडिथ क्लार्क
भाई (Brother)विलियम
बहन (Sister) एलेन
धर्म (Religion)ईसाई

बॉन्ड का बचपन उनके माता-पिता के अलगाव और उनके पिता की मृत्यु के कारण दु:खों से भरा था. उन्होंने पढ़ने और लिखने में एकांत की तलाश की और 16 साल की उम्र में अपनी पहली लघु कहानियों में से एक लिखी. वे तब बेहतर संभावनाओं की तलाश में यूनाइटेड किंगडम चले गए लेकिन कुछ वर्षों बाद भारत लौट आए. उन्होंने एक युवा के रूप में स्वतंत्र होकर अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लघु कथाएँ और कविताएँ लिखकर अपना जीवनयापन किया. कुछ साल बाद उन्हें पेंग्विन बुक्स ने संपर्क किया, जिन्होंने उनके काम के कई संग्रह प्रकाशित किए, जिससे वह भारत में एक लोकप्रिय लेखक के रूप में प्रसिद्ध हो गए. रस्किन बॉन्ड को 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

रस्किन बॉन्ड का प्रारंभिक जीवन (Ruskin Bond Early Life) 

रस्किन बॉन्ड का जन्म 19 मई 1934 को कसौली, पंजाब में एक ब्रिटिश जोड़े एडिथ क्लार्क और ऑब्रे बॉन्ड के घर हुआ था. उनके पिता ने 1939 से 1944 तक रॉयल एयर फोर्स में सेवा की. जब वह छोटे थे तब उनके माता-पिता अलग हो गए और उसकी माँ ने जल्द ही एक पंजाबी व्यक्ति से दोबारा शादी कर ली. रस्किन अपने पिता के बहुत करीब थे जिनकी पीलिया से मृत्यु हो गई. तब रस्किन की उम्र 10 साल थी.

वह शिमला में बिशप कॉटन स्कूल गए, जहाँ से उन्होंने 1950 में स्नातक किया. उन्हें पढ़ना बहुत पसंद था और विशेष रूप से टी. ई. लॉरेंस, चार्ल्स डिकेंस, चार्लोट ब्रोंटे और रुडयार्ड किपलिंग के कार्यों से प्रभावित थे. जल्द ही उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और इरविन दिव्यता पुरस्कार और हैली लिटरेचर पुरस्कार सहित स्कूल में कई लेखन प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की. उन्होंने 1951 में 16 साल की उम्र में अपनी पहली लघु कहानी ‘अछूत’ लिखी थी.

हाई स्कूल से स्नातक करने के बाद वह बेहतर संभावनाओं की तलाश में यू.के. लंदन में रहते हुए उन्होंने अपने पहले उपन्यास, ऑन द रूम ऑन द रूफ’ पर काम करना शुरू किया. इसने जॉन लेवेलिन Rhys Prize (1957) जीता, जो एक ब्रिटिश राष्ट्रमंडल लेखक के तहत 30 वर्ष से कम उम्र वालों को दिया जाता हैं.

व्यक्तिगत जीवन (Personal Life)

रस्किन बॉन्ड ने कभी शादी नहीं की. वह मसूरी में अपने दत्तक परिवार के साथ रहते हैं.

रस्किन बॉन्ड का करियर (Career)

रस्किन बॉन्ड ने अपने कामों के लिए प्रकाशक खोजने की कोशिश करते हुए एक फोटो स्टूडियो में कुछ समय के लिए काम किया. एक बार जब उन्होंने अपने लेखन से पैसा कमाना शुरू कर दिया, तो वे भारत वापस चले गए और देहरादून में बस गए.

उन्होंने अगले कुछ साल स्वतंत्र लेखक के रूप में बिताए, अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लघु कथाओं और कविताओं को कलमबद्ध किया. 1963 में, वे मसूरी में रहने चले गए जहाँ उन्होंने अपने लेखन करियर को आगे बढ़ाया.

इस समय तक वह एक लोकप्रिय लेखक थे और उनके निबंध और लेख कई पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होते थे. जैसे कि ‘द पायनियर’, ‘लीडर’, ‘द ट्रिब्यून’ और ‘द टेलीग्राफ’. उन्होंने चार वर्षों तक एक पत्रिका का संपादन भी किया.

1980 में रस्किन बॉन्ड के सबसे लोकप्रिय उपन्यासों में से एक ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ प्रकाशित हुआ था. एक लेखक के रूप में उनकी बढ़ती प्रसिद्धी ने पेंगुइन बुक्स का ध्यान खींचा. प्रकाशकों ने 1980 के दशक में बॉन्ड से संपर्क किया और उन्हें कुछ किताबें लिखने के लिए कहा. उनके पिछले उपन्यासों में से दो, “ऑन द रूम”, “ऑन द रूफ” और इसके सीक्वल इन वैगंटेंट्स इन द वैली’ को 1993 में पेंगुइन इंडिया ने एक खंड में प्रकाशित किया था.

रस्किन बॉन्ड की किताबे (Ruskin Bond Books)

उनकी कई रचनाएँ जिनमें उनके नॉन-फिक्शन लेखन का संग्रह में निम्नलिखित किताबे हैं.

  • ‘हमारे पेड़ ग्रो इन देहरा'(Our Trees Still Grow In Dehra)
  • ‘द नाइट ट्रेन एट देवली'(The Night Train at Deoli)
  • ‘टाइम स्टॉप्स इन शामली'(Time Stops At Shamli),
  • ‘एक चेहरा अंधेरे में और अन्य अड्डा’ (A Face in the Dark and other Hauntings’)
  • ‘एक मौसम का भूत’ (A Season of Ghosts),
  • ‘राज से भूत की कहानियां’ (Ghost Stories from the Raj)
  • द बेस्ट ऑफ रस्किन बॉन्ड’

रस्किन बॉन्ड का लेखन कैरियर पांच दशकों से अधिक समय तक फैला रहा है, जिसमें उन्होंने विभिन्न शैलियों के साथ प्रयोग किया, जिसमें कल्पना, निबंध, आत्मकथात्मक, गैर-कल्पना, रोमांस और बच्चों के लिए किताबें शामिल हैं. उन्होंने 500 से अधिक लघु कथाएँ, निबंध और उपन्यास, बच्चों के लिए 50 से अधिक पुस्तकें और दो आत्मकथाएँ(two volumes of autobiography,), एक लेखक के जीवन के दृश्य (‘Scenes from a Writer’s Life’) और द लैंप इस द लिट’(The Lamp is Lit’) लिखी हैं.

उनके कुछ कार्यों को टेलीविजन और फिल्मों के लिए अनुकूलित किया गया है. बॉलीवुड निर्देशक विशाल भारद्वाज ने 2007 में बच्चों के लिए अपने उपन्यास, द ब्लू अम्ब्रेला पर आधारित एक फिल्म बनाई. इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता. हिंदी फिल्म “7 खून माफ” , बॉन्ड की लघु कहानी सुसन्ना के सात पतियों पर आधारित है.

प्रमुख कार्य (Major Works)

उपन्यास ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है. कहानी एक छोटी लड़की के बारे में है जो अपने पुराने तेंदुए के पंजे के हार को एक सुंदर, मटमैले नीले रंग की छतरी के लिए तैयार करती है. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गाँव में स्थित, यह एक सरल लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी है. जिसे बाद में विशाल भारद्वाज की एक हिंदी फिल्म और अमर चित्र कथा प्रकाशनों द्वारा एक कॉमिक में रूपांतरित किया गया.

1978 की हिंदी फिल्म ‘जूनून’ इस प्रसिद्ध लेखक के ऐतिहासिक उपन्यास ‘ए फ्लाइट ऑफ पीजन्स’ पर आधारित है.

पुरस्कार और उपलब्धियां (Awards and achievements)

रस्किन बॉन्ड को 1992 में (Our Trees Still Grow In Dehra) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला.

उन्हें 1999 में पद्म श्री और 2014 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

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