हिंदी भाषा में छोटी व बड़ी मात्राओं से अर्थ बदलने वाले समोच्चरित शब्द और उनकी परिभाषा

हिंदी वर्णमाला में 11 स्वर होते हैं और प्रत्येक स्वर की एक ‘मात्रा’ होती है। इन 11 स्वरों की मात्राओं के अलावा भी कुछ अन्य मात्राएं हिंदी भाषा में होती है। ‘इ/छोटी-इ’ व ‘ई/बड़ी-इ’ की मात्राओं तथा ‘उ/छोटे-उ’ व ‘ऊ/बड़े-उ’ की मात्राओं के लेखन के समय कई बार असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसी असमंजस की स्थिति पर इस लेख में प्रकाश डाला गया है।

समोच्चरित / समश्रुतिभिन्नार्थक / समोच्चरित-भिन्नार्थक शब्द / Paronyms (पेरोनिम्स)

जो शब्द सुनने और उच्चारण करने में समान प्रतीत हों, किन्तु जिनका लेखन व अर्थ भिन्न-भिन्न हों, वे समोच्चरित शब्द कहलाते हैं”।

समोच्चरित शब्दों के एक भाग पर ही है लेख में चर्चा की गई है :-

इस लेख में प्रत्येक समोच्चरित शब्द पर बात नहीं हो रही है। यहां ‘इ’ व ‘उ’ स्वरों की छोटी व बड़ी मात्राओं पर ही ध्यान दिया जा रहा हैं। उदाहरण के तौर पर – ‘अनल, अनिल’ एवं ‘परिणाम, परिमाण’ ये दोनों जोड़ियां सम्मोचरित-शब्दों में सम्मिलित की जाती है, किंतु इस लेख में ऐसे शब्द विषय नहीं हैं। ‘अनल, अनिल’ में मात्रा की उपस्थिति व अनुपस्थिति है, वहीं ‘परिणाम, परिमाण’ में वर्णों ‘ण’ व ‘म’ के स्थान ही परिवर्तित कर दिये गए हैं।

बड़ी व छोटी मात्राओं पर विचार

  • ‘ई/बड़ी-इ’ व ‘ऊ/बड़े-उ’ की मात्रा लगाए जाने पर वर्ण का उच्चारण, छोटी मात्राओं की तुलना में, लंबी/दीर्घ अवधि का हो जाता है, साथ ही इस उच्चारण में तुलनात्मक रुप से अधिक जोर लगाना पड़ता है।
  • वहीं, छोटी मात्रा (इ, उ) के साथ वर्ण का उच्चारण तुलनात्मक रुप से कम अवधि का होता है एवं उच्चारण में कम जोर लगाना पड़ता है।
  • प्राय: लिखते, पढ़ते व बोलते समय हम बड़ी व छोटी मात्राओं पर अधिक ध्यान नहीं देते। आम हिंदी भाषी शब्द के लेखन व उच्चारण से अधिक, शब्द के परिप्रेक्ष्य, संदर्भ या वाक्य से शब्द के अर्थ का बोध करता है।

उदाहरण : वाक्य – वह व्यक्ति सूखी है।

इस वाक्य में परिप्रेक्ष्य के अनुसार हम तुरंत ‘सूखी’ का अर्थ ‘प्रसन्न, खुश, हर्षित’ निकाल लेंगें। किंतु ‘उ’ व ‘ऊ’ की मात्रा की दृष्टि से ‘सूखी’ का अर्थ है ‘जो गीली ना हो’। साथ ही, ‘सुखी’ का अर्थ है ‘प्रसन्न, खुश, हर्षित’।

बड़ी की जगह छोटी मात्रा आने पर शब्द का अर्थ परिवर्तित होने के उदाहरण :-

  • अवधि = समय-सीमा
    अवधी = यूपी की एक बोली
  • आदि = आरंभ, इत्यादि
    आदी = अभ्यस्त
  • गिरि = पहाड़
    गिरी = बीज, ‘गिरने’ संबंधित शब्द। उदाहरण – बोरवेल में ‘गिरी’ चार साल की बच्ची।
  • चिता = शव जलाने हेतु लकड़ियों का ढेर
    चीता = विडाल वंश की एक प्रजाति जो सबसे तेज गति व खाल पर चित्तियों के लिए जानी जाती है।
  • चिर = बहुत, पुराना
    चीर = कपड़ा
  • चुकना = समाप्त होना। उदाहरण – अच्छी बिक्री के चलते व्यापारी का कर्ज चुकना संभव हो सका।
    चूकना = भूल करना
  • जाति = जन्म आधारित समुह
    जाती = आवागमन संबंधित शब्द। उदाहरण – यहां से शहर तक बस ‘जाती’ है।
  • टीका = तिलक, आलोचना, तर्क-वितर्क
    टिका = ‘टिकना’ शब्द का रुप। उदाहरण – हर रिश्ता विश्वास पर ‘टिका’ होता है।
  • दिन = दिवस
    दीन = गरीब
  • दिवा = दिवस
    दीवा = दीया
  • दिया = ‘देने’ संबंधित शब्द। उदाहरण – हिंदू धर्म में महीलाओं को विशेष सम्मान ‘दिया’ जाता हैं।
    दीया = दीपक, उजाले के लिये जलाई हुई बत्ती
  • नित = सदा, सर्वदा, हमेशा
    नीत = पहुँचाया हुआ, स्थापित। उदाहरण – अर्जुन नीत सेना (अर्जुन द्वारा स्थापित की गई सेना)।
  • नियत = निश्चित
    नीयत = इरादा
  • पिता = बाबा
    पीता = ‘पीने’ से संबंधित शब्द। उदा – वह पानी ‘पीता’ है।
  • पीटना = मारना
    पिटना = मार खाना, हारना
  • बहु = अत्यधिक
    बहू = पुत्रवधू
  • बली = बलवान
    बलि = भेंट, बलिदान
  • भिड़ = ‘भिड़ना’ शब्द का रुप, टक्कर। उदाहरण – गांव के मैदान में दो सांड ‘भिड़’ गए, तो उनकी लड़ाई देखने ‘भीड़’ जमा हो गई।
    भीड़ = जन समुह
  • लुटना = लुट जाना, बर्बाद होना। उदाहरण – सुरक्षाकर्मियों व कर्मचारियों की बहादुरी के कारण बैंक लुटने से बच गया।
    लूटना = लूट लेना, बर्बाद करना
  • सुत = पुत्र
    सूत = सारथी (शूद्र वर्ण), धागा
  • सुखी = खुश व्यक्ति
    सूखी = जो वस्तु गीली ना हो
  • हरि = भगवान विष्णु
    हरी = हरे रंग की

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