बच्चों के लिए 5 शिक्षाप्रद कहानियां | Moral Stories for Children in Hindi

छोटे बच्चों को सुनाने के लिए 5 शिक्षाप्रद कहानियां | Top 5 Moral Stories for Children in Hindi | Bachho Ki Kahaniyan Hindi Me

छोटे बच्चों को कहानियां सुनने का बहुत शौक रहता हैं. आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में सब इतने व्यस्त हैं कि बच्चों को कहानी सुनाने का किसी के पास समय नहीं हैं. अगर समय हैं भी मोबाइल इसमें सबसे बड़ी बाधा है. परन्तु आज भी कई माता-पिता अपने बच्चों को कहानी पूरे हाव-भाव और मजे के साथ सुनाते हैं. हम आपके लिए लाये कुछ बेहतरीन शिक्षाप्रद कहानी जो आपके बच्चों में नैतिक मूल्यों का उत्थान करेगी.

1. एक जादुई पेड़ की कहानी

दो भाई थे जो एक जंगल के किनारे रहते थे. बड़े भाई अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करता था और सभी एक साथ खाना खाते थे. एक दिन बड़े भाई बाजार में बेचने के लिए, जलाऊ लकड़ी की तलाश में जंगल गए. वह पेड़ के बाद पेड़ की शाखाओं को काटते हुए चला गया और अंतत: वह एक जादुई पेड़ पर आया. पेड़ ने उससे कहा, “अरे दयालु! कृपया मेरी शाखाओं को मत काटिए. यदि आप मुझे बख्शते हैं, तो मैं आपको अपना सुनहरा सेब दूंगा.” बड़े भाई ने सहमति व्यक्त की लेकिन पेड़ ने उसे जो सेब दिए, वह उसकी संख्या से वह निराश था.

लालच में आकर उसने पेड़ को धमकी दी कि अगर पेड़ ने उसे और सेब नहीं दिए तो वह उसे पूरी तरह से काट देगा. बड़े भाई की इस बात से नाराज जादुई पेड़ ने बड़े भाई पर सैकड़ों छोटी-छोटी सुइयों की बौछार कर दी. बड़े भाई दर्द से चिल्लाते हुए जमीन पर गिर गया. दर्द के कारण बड़ा भाई तड़प रहा था. शाम का समय भी हो चूका था. छोटा भाई चिंतित हो गया और अपने बड़े भाई की तलाश में जंगल में गया. उसने देखा कि बड़े भैया के शरीर पर सैकड़ों सुइयों लगी हुई हैं. वह अपने भाई के पास गया और प्रत्येक सुई को श्रमसाध्य प्रेम से हटा दिया. बाद में बड़े भाई ने पेड़ के साथ बुरा व्यवहार करने के लिए माफी मांगी. पेड़ ने बड़े भाई के दिल में परिवर्तन देखा और उन्हें सभी सुनहरे सेब दिए.

कहानी की शिक्षा

यदि आप अपने काम के प्रति ईमानदार और दूसरों के प्रति दयालु है तो इसका अच्छा फल जरुर मिलता हैं.

2. बुद्धिमानी से गिनती

अकबर ने एक बार अपनी अदालत में एक प्रश्न रखा कि “शहर में कुल कितने कौवे हैं.” इस प्रश्न ने सभी को हैरान कर दिया. सभी लोग ने जवाब जानने की कोशिश की. परन्तु उत्तर किस प्रकार निकाले किसी को भी समझ में नहीं आ रहा था. बीरबल ने इस पर कहा और पूछा कि मामला क्या था और इसलिए अदालत में मौजूद लोगों ने बीरबल को सवाल बताया.

बीरबल तुरंत मुस्कुराए, अकबर के पास गए और घोषणा की कि उनके सवाल का जवाब इक्कीस हजार पांच सौ तेईस है. जब उनसे पूछा गया कि उन्हें जवाब कैसे पता है, तो बीरबल ने जवाब दिया. अपने आदमियों से कौवे की संख्या गिनने को कहें. यदि अधिक हैं, तो शहर के बाहर के कौवे के रिश्तेदार उनसे मिलने आये हैं. यदि कम हैं, तो कौवे शहर से बाहर अपने रिश्तेदारों से मिलने गए हैं. जवाब से प्रसन्न होकर, अकबर ने बीरबल को माणि और मोती की माला भेंट की.

कहानी की शिक्षा

आपके उत्तर के लिए स्पष्टीकरण होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उत्तर देना.

3. बचाओं भेड़िया आया

एक लड़का था, जिसके पिता ने उसे एक दिन कहा कि “वह भेड़ की देखभाल करने के लिए काफी बूढ़े हो गए.” भेड़ों को हर दिन घास के खेतों में ले जाना पड़ता था और भेड़ से मोटी ऊन प्राप्त करने के लिए उन्हें देखना पड़ता और चराना पड़ता था. बूढ़े होने के कारण पिता ने अपने बालक को भेड़ चराने के लिए कहा.

लड़का हालांकि दु:खी था. वह दौड़ना और खेलना चाहता था. वह उबाऊ भेड़ नहीं देखता चाहता था. इसलिए उसने इसके बजाय कुछ मज़ा करने का फैसला किया. वह जोर से चिल्लाया “बचाओ.. भेड़िया.. भेड़िया..”. सभी गाँव वाले हथियार और पत्थर लेकर जंगल में बच्चे को बचने के लिए पहुंचे. जब उन्होंने देखा कि कोई भेड़िया नहीं है, तो गाँव वालों ने कहा कि लड़का शरारत में हमारा समय बर्बाद कर रहा है. अगले दिन लड़का फिर चिल्लाया “बचाओं.. भेड़िया..” और ग्रामीण फिर से भेड़िया का पीछा करने के लिए दौड़े. परन्तु भेड़िया नहीं मिला. लड़के ने गाँव वालों के साथ फिर मजाक किया.

तीसरे दिन जब वह लड़का एक छोटी पहाड़ी पर गया, उसने अचानक एक भेड़िये को अपनी भेड़ों पर हमला करते देखा. वह जितना आवाज लगा सकता था उसने लगाई. बचाओं.. भेड़िया.. भेड़िया.. लेकिन ग्रामीणों ने सोचा कि वह उन्हें फिर से बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है. इसलिए वे भेड़ को बचाने के लिए नहीं गए. छोटे लड़के ने उस दिन तीन भेड़ें खो दीं, क्योंकि बार- बार गाँव वालों से झूठ बोलकर बुला लेता था.

कहानी की शिक्षा

कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए अन्यथा जब आप सच बोलेंगे तो भी यही समझा जायेगा की आप झूठ बोल रहे हैं.

4. सोनपरी

एक गांव में बहुत ही लालची अमीर आदमी रहा करता था. एक दिन उसे एक परी मिली. जिसके बाल कुछ पेड़ों की शाखाओं में फंस गए थे. आदमी ने यह सोचा कि वह उस परी की मदद करेगा बदले में वो उसे एक वरदान देगी. उसने परी के बालों को पेड़ की शाखाओं से निकल दिया. परी ने उससे एक वरदान मांगने को कहा. आदमी ने वरदान में यह माँगा कि वह जिस भी चीज को छुए वह सोने की बन जाए.

लालची व्यक्ति अपनी पत्नी और बेटी को अपने नए वरदान के बारे में बताने के लिए घर गया. रास्ते में सभी पत्थर और कंकड़ को छूते हुए और उन्हें सोने में परिवर्तित कर दिया. एक बार जब वह घर गया, तो उसकी बेटी उसे बधाई देने के लिए दौड़ी. जैसे ही वह उसे अपनी बेटी को गले लगाने की कोशिश की वह एक सोने की मूर्ति में बदल गई. उसने अपनी मूर्खता का एहसास किया और अपने बाकी दिनों को अपनी इच्छा को दूर करने के लिए वापस परी के पास गया. आदमी ने परी से माफ़ी माँगी और कहा मैंने आपकी मजबूरी का फायदा उठाया हैं. मुझे यह वरदान नहीं चाहिए. मेरी बेटी को वापस ठीक कर दीजिये.

कहानी की शिक्षा

लालच हमेशा पतन की ओर ले जाता हैं.

5. गुलाब और कैक्टस की कहानी

एक गुलाब का फूल था जिसे अपने खूबसूरत रूप पर बहुत गर्व था. वह अपनी खूबसूरती पर अभिमान करता था जबकि दूसरी ओर कैक्टस चुप रहता था. बगीचे के अन्य सभी पौधों भी गुलाब की बातों में आकर कैक्टस को बुरा-भला कहते थे. हर दिन गुलाब कैक्टस को उसके रूप का अपमान करता.

गर्मियों में, बगीचे में मौजूद कुएं सूख गए और पौधों के लिए पानी नहीं था. गुलाब विलीन होने लगा. उसने देखा कि एक गौरैया ने अपनी चोंच को कुछ पानी के लिए कैक्टस में गुसा दिया. जिसके बाद गुलाब को शर्मिंदगी महसूस हुई. उसने कैक्टस से पूछा कि क्या वह भी कुछ पानी ले सकता है. दयालु कैक्टस आसानी से सहमत हो गए और वे दोनों कठिन गर्मियों में अच्छे दोस्त बन गए.

कहानी की शिक्षा

किसी की शक्ल से उसकी अच्छाई का पता नहीं चलता हैं.

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