हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है ?| Hindi Divas Speech, Essay (Nibandh) in Hindi

हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है ? | Hindi Divas Speech, Essay (Niband) in Hindi

जब हमारा देश आजाद हुआ तब भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ था, क्योंकि भारत में अनेकों भाषाएँ बोली जाती थी. 6 दिसंबर 1946 में आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान का गठन हुआ और 26 जनवरी 1950 (गणतंत्र दिवस) को इसे पुर्णतः लागू कर दिया गया. लेकिन उससे पहले बड़ा मुद्दा था “भाषा”, किस भाषा को भारत की राष्ट्रभाषा चुना जाए ? उसके बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा मे एकमत के निर्णय से हिंदी व अंग्रेजी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाया गया. इस सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हुई हिन्दी भाषा को राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर घौषित कर पुष्ठी की. उस साल से हर साल 14 सितंबर को हम हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं.

हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है ?

हिन्दी पूरे विश्व में बोली जाने वाली मुख्य भाषाओं में से एक है. विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा है और यह दुनियाभर में हमें सम्मान भी दिलाती है. यह भाषा है हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है. इस भाषा ने हमें विश्व में एक नई पहचान दिलाई है. हिन्दी भाषा विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है. हिंदी दिवस ,हिंदी की महत्वता दर्शाने के लिए मनाया जाता है. आधुनिक हो रहे हमारे देश में, लोग अंग्रेजी को इतनी जल्दी अपनाने लगे है कि हमारी राष्ट्रभाषा का महत्व विलुप्त होता जा रहा है, यह हमारी राष्ट्रभाषा और मातृभाषा है, इसका महत्व सभी को ज्ञात होना चाहिए.

हिंदी दिवस पर, हिंदी भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों को सम्मानित किया जाता है. स्कूल और कॉलेजों में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम होते हैं जिनमे हिंदी की महत्वता के बारे में चर्चा होती है. हिंदी पर भाषण दिए जाते हैं कविताएं बोली जाती हैं और कुछ सेमिनार्स में इसे और बेहतर करने पर जोर दिया जाता है.

भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा | Hindi Divas Speech

भारत में हिंदी सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाला भाषा है. हालांकि अंग्रेजी के प्रति अभी भी भारतवासियों का झुकाव अधिक है और अंग्रेजी के महत्व पर स्कूलों और अन्य स्थानों पर जोर दिया जाता है, परन्तु फिर भी हिंदी हमारे देश की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा के रूप में अडिग है.

2001 में आयोजित जनगणना के अनुसार 422 लाख से अधिक लोगों ने अपनी मातृभाषा के रूप में हिंदी का वर्णन किया था. देश में किसी भी अन्य भाषा का कुल आबादी का 10% से अधिक उपयोग नहीं किया जाता है. हिंदी बोलने वाली अधिकांश आबादी उत्तर भारत में मौजूद है. भारत के हर प्रान्त में कहीं न कहीं कोई न कोई हिंदी बोलने वाला मिल ही जाता है. हिंदी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और झारखंड सहित कई भारतीय राज्यों की आधिकारिक भाषा है.

आखिर क्यूँ हिंदी भाषा, अंग्रेजी भाषा से पिछड़ रही है ? | Hindi Divas Speech

बिहार देश का पहला राज्य था जिसने अपनी एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाया. बंगाली, तेलुगु और मराठी देश की अन्य व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाएं हैं. भले ही हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है परन्तु इसके मूल देश में लोग इसको महत्व नहीं देते हैं. स्कूल से लेकर कॉलेज, कॉर्पोरेट, कार्यालयों तक अंग्रेजी को अधिक प्राथमिकता दी जाती है और हिंदी अंग्रेजी से पिछड़ जाती है.

माता-पिता, शिक्षकों और हर किसी को लिखित और मौखिक रूप से अंग्रेजी सीखने के महत्व पर जोर देना आम बात है क्योंकि इससे नौकरी हासिल करने में काफी मदद मिलती है. यह देखना दुखदाई है कि नौकरियों और शैक्षिक पाठ्यक्रमों के लिए भी लोगों को स्मार्ट होना पड़ता है क्योंकि नौकरी पर रखने वाले अधिकारी उन्हें उनके अंग्रेजी से संबंधित ज्ञान के आधार पर चुनते हैं.

हिंदी दिवस का महत्व

हमारे भारत मे स्मार्ट होने का मतलब ही अंग्रेजी आना हो गया है. बहुत से लोग सिर्फ इसलिए काम करने का अवसर खो देते हैं क्योंकि वे अंग्रेजी नहीं बोल पाते भले ही वे काम के बारे में अच्छी जानकारी रखते हों. हिंदी दिवस ऐसे लोगों को जगाने का प्रयास है और उनमें हिंदी भाषा के लिए सम्मान स्थापित करने का प्रयास है।

नीचे दी गयी योगेश कुमार सिंह की कविता हिंदी की अभिलाषा, हिंदी के सौंदर्य और महत्व को दर्शाती है. कवि या लेखक हमारे समाज मे अंतर लाने वाले लोग होते हैं. योगेश कुमार जैसे ही हर लेखक को ऐसे हालातों पर कविता करनी चाहिए.

राष्ट्रभाषा हिंदी पर लिखी कविता | Hindi Diwas Poem

‘हिंदी की अभिलाष

हिंदी थी वह जो लोगो के ह्रदयों में उमंग भरा करती थी,
हिंदी थी वह भाषा जो लोगो के दिलों मे बसा करती थी|
हिंदी को ना जाने क्या हुआ रहने लगी हैरान परेशान,
पूछा तो कहती है अब कहां है मेरा पहले सा सम्मान|
मैं तो थी लोगो की भाषा, मैं तो थी क्रांति की परिभाषा,
मैं थी विचार-संचार का साधन मैं थी लोगो की अभिलाषा|
मुझको देख अपनी दुर्दशा आज होती है बड़ी निराशा,
सुन यह दुर्दशा व्यथा हिंदी की ह्रदय में हुआ बड़ा आघात,
बात तो सच है वास्तव में हिंदी के साथ हुआ बड़ा पक्षपात|
हिंदी जो थी जन-जन की भाषा और क्रांति की परिभाषा,
वह हिंदी कहती है लौटा दो उसका सम्मान यही हैं उसकी अभिलाषा|
अपने ही देश में हिंदी दिवस को तुम बस एक दिन ना बनाओ,
मैं तो कहता हुं हिंदी दिवस का यह त्योहार तुम रोज मनाओ|
आओ मिलकर प्रण ले हम सब करेंगे हिंदी का सम्मान,
पूरी करेंगे हिंदी की अभिलाषा देंगे उसे दिलों में विशेष स्थान
योगेश कुमार सिंह

हिंदी का महत्व पता होना हमारे सभी देश वाशियों के लिए अति आवश्यक है, हम सभी को हिंदी का महत्व समझना चाहिए और इसे गर्व से अपनी मातृभाषा के रूप में अपनाना चाहिए.

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