विनायक चतुर्थी का महत्व, पूजा विधि और कथा | Vinayak Chaturthi Ka Mahatva, Puja Vidhi and Story in Hindi

विनायक चतुर्थी का महत्व, पूजा विधि, प्रमुख तिथियाँ और व्रत कथा | Vinayak Chaturthi Significance, Puja Vidhi, Major Dates and Vrat Story in Hindi

सबसे महत्वपूर्ण विनायक चतुर्थी भाद्रपद के महीने में आती है, हालांकि हर महीने विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाता हैं. भाद्रपद माह के दौरान पड़ने वाली विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है. गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म में सबसे शुभ त्यौहारों में से एक है जिसे पूरे विश्व में विशेष रूप से भारत में बहुत बड़े पैमाने पर मनाया जाता हैं. गणेश चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, भारत में मनाया जाने वाला सबसे शुभ हिंदू त्यौहार में से एक हैं. भगवान गणेश समृद्धि, ज्ञान और सौभाग्य के प्रतीक हैं. यह त्यौहार पूरे भारत में 11 दिनों तक बहुत उत्साह और जुनून के साथ मनाया जाता हैं.

विनायक चतुर्थी का महत्व (Vinayak Chaturthi Ka Mahatva)

गणेश चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, एक हिंदू त्यौहार है जो हिंदू धर्म में अन्य देवताओं पर प्रथम पूज्य भगवान गणेश के महत्व को दर्शाता हैं. यह हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के उज्ज्वल या एपिलेशन चरण) के चौथे दिन मानी जाती हैं. ग्रेगोरियन अनुसूची के अनुसार यह दिन आमतौर पर अगस्त या सितंबर के समय के आसपास आता हैं. गणेश चतुर्थी के दिन लोग भगवान गणेश के जन्म तिथि को उत्सव के रूप में मानते हैं और दस दिनों के लिए उनकी पूजा वेदी पर अपनी मिट्टी का चिह्न व मूर्ति लगाते हैं.

विनायक चतुर्थी वर्ष 2019 में (Upcoming Vinayak Chaturthi in 2019)

हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो चतुर्थी आती हैं. अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता हैं. वर्ष 2019 की सभी विनायक चतुर्थी निम्नलिखित हैं.

तिथि दिन चतुर्थी तिथि आरम्भ चतुर्थी तिथि समाप्ति
10 जनवरी गुरुवार 10 जनवरी पूर्वाह्न 11:26 से 11 जनवरी अपराह्न 13:30 तक
08 फरवरी शुक्रवार 08 फरवरी पूर्वाह्न 11:30 से 09 फरवरी अपराह्न 1:40 तक
10 मार्च रविवार 10 मार्च पूर्वाह्न 11:21 से 11 मार्च अपराह्न 1:41 तक
09 अप्रैल मंगलवार 09 अप्रैल पूर्वाह्न 11:07 से 10 अप्रैल अपराह्न 1:38 तक
08 मई बुधवार 08 मई पूर्वाह्न 10:58 से 09 मई अपराह्न 1:37 तक
06 जून गुरूवार 06 जून पूर्वाह्न 10:57 से 07 जून अपराह्न 1:42 तक
06 जुलाई शनिवार 06 जुलाई पूर्वाह्न 11:03 से 07 जुलाई अपराह्न 13:09 तक
04 अगस्त रविवार 04 अगस्त पूर्वाह्न 11:07 से 05 अगस्त अपराह्न 1:46 तक
02 सितम्बर सोमवार 02 सितम्बर पूर्वाह्न 11:05 से 03 सितम्बर अपराह्न 13:36 तक
02 अक्टूबर बुधवार 02 अक्टूबर पूर्वाह्न 10:59 से 03 अक्टूबर पूर्वाह्न 11:39 तक
31 अक्टूबर गुरूवार 31 अक्टूबर पूर्वाह्न 10:58 से 01 नवंबर अपराह्न 1:10 तक
30 नवम्बर शनिवार 30 नवम्बर पूर्वाह्न 11:07 से 30 नवम्बर अपराह्न 1:11 तक
30 दिसम्बर सोमवार 30 दिसम्बर पूर्वाह्न 11:22 से 31 दिसम्बर अपराह्न 1:24 तक

विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vinayak Chaturthi Vrat Katha)

एक समय देवी पार्वती ने स्नान करते हुए बालक की मूर्ति को उस उपटन से बनाती है जिसका उपयोग वह स्वयं स्नान के लिए करती थी. बालक की मूर्ति उनको इतना मन भा जाती हैं कि वह उस मूर्ति में प्राण डाल देती हैं, इस प्रकार गणेश का जन्म होता हैं. माता पार्वती ने उसे एक रक्षक के रूप में घर के प्रवेश द्वार पर रहने के लिए कहा. पार्वती ने गणेश को कहा कि जब वह नहा रही हो तो उन्हें घर में किसी को भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं देना हैं. कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुँचते हैं लेकिन वहां आये भगवान शिव को गणेश द्वारा द्वार पर रोक दिया गया. थोड़े से तर्क के बाद भगवान शिव ने उसे अंदर जाने के लिए कहा लेकिन गणेश ने मना कर दिया और कहा कि माँ ने घर की सुरक्षा करने के लिए कहा है. भगवान शिव ने समझाने की कोशिश की कि वह देवी पार्वती के पति थे और किसी की अनुमति के बिना घर में प्रवेश करने का अधिकार था लेकिन गणेश ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे भगवान शिव बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर काट दिया. उन्हें नहीं पता था कि गणेश उनके पुत्र थे. शोर सुनकर जब पार्वती बाहर आईं तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा मृत पड़ा है. उन्होंने भगवान शिव को रोकने के पीछे का वृतांत बताया और उसके क्रोध में भगवान शिव से कहा कि वह पूरी दुनिया को नष्ट कर देगी. बाद में भगवान ब्रह्मा देवी पार्वती के पास गए और दुनिया को विनाश से बचाने के लिए दया की मांग की. फिर वह दो शर्तों पर सहमत हुई: एक यह कि उसके बेटे को अपना जीवन वापस मिल जाना चाहिए और उन्हें सभी देवी-देवताओं से भी पूर्व पूजा जाएगा.

उसके बाद हाथी के मस्तिष्क लगाया गया और उन्हें जीवित कर दिया. भगवान शिव ने अपने दुर्व्यवहार और अहंकार के लिए माफी मांगी. उन्होंने यह घोषणा की कि गणेश को सभी से पहले भगवान के रूप में सम्मानित किया जाएगा और सभी देवी-देवताओं के सामने उनकी पूजा की जाएगी. उन्हें गणों के प्रमुख और विघ्नेश्वरा, सभी बाधाओं के भगवान और विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाएगा, जो सभी बाधाओं को ध्वस्त करते हैं. साथ ही, भगवान गणेश को सौभाग्य, बुद्धि, ज्ञान और दया के देवता के रूप में निरूपित किया जाता है. इसके अलावा, किसी भी अच्छे काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है, जिसमें पढ़ाई, शादी, व्यवसाय आदि शामिल हैं.

विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और नियम (Vinayak Chaturthi Puja Vidhi aur Niyam)

  1. सूर्योदय के पहले उठकर स्नान कर लें. इस दिन पूरा दिन उपवास रखा जाता है, शाम की पूजा के बाद भोजन ग्रहण करते है. उसके बाद गणेश जी की मूर्ती विराजमान करे.
  2. श्रीगणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रखें.
  3. सर्वप्रथम भगवान की प्रतिमाओं का दूध और गंगा जल से अभिषेक करे और नई पोशाक पहनाएं.
  4. कलश पर मेहँदी, रोली, कुमकुम, अबीर, गुलाल, चावल और नाडा चढ़ाकर पूजन प्रारंभ करे.
  5. उसके बाद गणेश जी को मेहँदी, रोली, कुमकुम, अबीर, गुलाल, चावल और नाडा चढ़ाएं.
  6. कथा के बाद चंद्रमा को अर्ध्य देने की परंपरा हैं. चन्द्रमा को जल के छीटे देकर कुमकुम और चावल चढ़ाएं.
  7. इस दिन महिलाएं रात्रि में चंद्रमा को अर्ध्य देकर अपना उपवास खोलती हैं.
  8. यदि चंद्रमा उदय होता हुआ नहीं दिख रहा हो तो रात्रि में लगभग 11:30 बजे आसमान की ओर अर्ध्य देकर उपवास को खोला जा सकता हैं.
  9. विधिवत तरीके से गणेश पूजा करने के बाद गणेश मंत्र ‘ॐ गणेशाय नम:’ अथवा ‘ॐ गं गणपतये नम:’ की एक माला (यानी 108 बार गणेश मंत्र का) जाप अवश्य करें.

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Ujjawal Dagdhi

Ujjawal Dagdhi

उज्जवल दग्दी दिल से देशी वेबसाइट के मुख्य लेखकों में से एक हैं.

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