अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार | Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी के सुप्रसिद्ध विचार और वाक्य | Atal bihari vajpayee Quotes in Hindi | Atal bihari Vajpayee Ke Anmol Vichar

अटल बिहारी वाजपेयी जिन्हें देश का बच्चा-बच्चा जनता है. वे बीजेपी के दिग्गज नेता रहे है. उनके विचार इतने अच्छे है जो सभी को आकर्षक करते है. अटल जी के विचार उनके नाम की तरह ही अटल है. उनके विचार पत्थर में भी जान फूंक देते है. आइए जानते है उनके द्वारा कहे गये कुछ दिल को छु जाने वाले विचार  

अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार (Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi)

पहले एक दृढ विश्वास था कि संयुक्त राष्ट्र अपने घटक राज्यों की कुल शक्ति की तुलना में अधिक मजबूत होगा।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता. ~ अटल बिहारी वाजपेयी

कंधे-से-कंधा लगाकर, कदम-से-कदम मिलाकर हमें अपनी जीवन-यात्रा को ध्येय-सिद्धि के शिखर तक ले जाना है. भावी भारत हमारे प्रयत्नों और परिश्रम पर निर्भर करता है. हम अपना कर्तव्य पालन करें, हमारी सफलता सुनिश्चित है.

~अटल बिहारी वाजपेयी

राष्ट्र की सच्ची एकता तब पैदा होगी, जब भारतीय भाषाएं अपना स्थान ग्रहण करेंगी.

होने, ना होने का क्रम, इसी तरह चलता रहेगा. हम हैं, हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा.

लोकतंत्र एक ऐसी जगह है जहां दो मूर्ख मिलकर एक ताकतवक इंसान को हरा देते हैं.

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आप मित्र बदल सकते हैं, पर पड़ोसी नहीं.

~ अटल बिहारी वाजपेयी

भारत एक प्राचीन राष्ट्र है ।  अगस्त, को किसी नए राष्ट्र का जन्म नहीं, इस प्राचीन राष्ट्र को ही स्वतंत्रता मिली.

Vajpayee Quotes

इतिहास में हुई भूल के लिए आज किसी से भी बदला लेने का समय नहीं है,लेकिन उस भूल को ठीक करने का सवाल है.

पारस्परिक सहकारिता और त्याग की प्रवृत्ति को बल देकर ही मानव-समाज प्रगति और समृद्धि का पूरा-पूरा लाभ उठा सकता है .

निरक्षरता का और निर्धनता का बड़ा गहरा संबंध है.

शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए. ऊंची-से-ऊंची शिक्षा मातृभाषा के माध्यम से दी जानी चाहिए.

मेरे पास ना दादा की दौलत है और ना बाप की. मेरे पास मेरी मां का आशीर्वाद है. 

यदि भारत को बहुराष्ट्रीय राज्य के रूप में वर्णित करने की प्रवृत्ति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो भारत के अनेक टुकड़ों में बंट जानै का खतरा पैदा हो जाएगा.

भुखमरी ईश्वर का विधान नहीं, मानवीय व्यवस्था की विफलता का परिणाम है.

मैं हमेशा से ही वादे लेकर नहीं आया, इरादे लेकर आया हूं.

क्यों मैं क्षण-क्षण में जियुं? कण-कण में बिखरे सौंदर्य को पियूं?

गरीबी बहुआयामी है यह हमारी कमाई के अलावा, स्वास्थ्य राजनीतिक भागीदारी, और हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है.

~अटल बिहारी वाजपेयी

इस देश में कभी मजहब के आधार पर, मत-भिन्नता के उगधार पर उत्पीड़न की बात नहीं उठी, न उठेगी, न उठनी चाहिए.

भारत कोई इतना छोटा देश नहीं है कि कोई उसको जेब में रख ले और वह उसका पिछलग्गू हो जाए । हम अपनी आजादी के लिए लड़े, दुनिया की आजादी के लिए लड़े.

जीत और हार जीवन का एक हिस्सा है, जिसे समानता के साथ देखा जाना चाहिए.

राष्ट्र कुछ संप्रदायों अथवा जनसमूहों का समुच्चय मात्र नहीं, अपितु एक जीवमान इकाई है.

मैं चाहता हूं भारत एक महान राष्ट्र बने, शक्तिशाली बने, संसार के राष्ट्रों में प्रथम पंक्ति में आए ।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

अगर भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है, तो भारत बिल्कुल भारत नहीं है.

देश एक रहेगा तो किसी एक पार्टी की वजह से एक नहीं रहेगा, किसी एक व्यक्ति की वजह से एक नहीं रहेगा, किसी एक परिवार की वजह से एक नहीं रहेगा । देश एक रहेगा तो देश की जनता की देशभक्ति की वजह से रहेगा ।

होने, ना होने का क्रम, इसी तरह चलता रहेगा. हम हैं, हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा.

भारतीयकरण का एक ही अर्थ है भारत में रहने वाले सभी व्यक्ति, चाहे उनकी भाषा कछ भी हो, वह भारत के प्रति अनन्य, अविभाज्य, अव्यभिचारी निष्ठा रखें ।

अहिंसा की भावना उसी में होती है, जिसकी उरात्मा में सत्य बैठा होता है, जो समभाव से सभी को देखता है ।

भारतीयकरण एक नारा नहीं है । यह राष्ट्रीय पुनर्जागरण का मंत्र है । भारत में रहने वाले सभी व्यक्ति भारत के प्रति अनन्य, अविभाज्य, अव्यभिचारी निष्ठा रखें । भारत पहले आना चाहिए, बाकी सब कुछ बाद में ।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

हम अहिंसा में आस्था रखते हैं और चाहते हैं कि विश्व के संघर्षों का समाधान शांति और समझौते के मार्ग से हो.

देश एक मंदिर है, हम पुजारी हैं । राष्ट्रदेव की पूजा में हमें अपने को समर्पित कर देना चाहिए ।

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ यह भारत एक राष्ट्र है, अनेक राष्ट्रीयताओं का समूह नहीं ।

Atal Bihari Vajpayee Shayari

भारत के प्रति अनन्य निष्ठा रखने वाले सभी भारतीय एक हैं, फिर उनका मजहब, भाषा तथा प्रदेश कोई भी क्यों न हो ।

शहीदों का रक्त अभी गीला है और चिता की राख में चिनगारियां बाकी हैं । उजड़े हुए सुहाग और जंजीरों में जकड़ी हुई जवानियां उन उग्त्याचारों की गवाह हैं। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

आदमी को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लादे, एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े। 

हमारे परमाणु हथियार विशुद्ध रूप से किसी विरोधी के परमाणु हमले को हतोत्साहित करने के लिए हैं.

हिन्दू धर्म तथा संस्कृति की एक बड़ी विशेषता समय के साथ बदलने की उसकी क्षमता रही है ।

जो लोग हमसे पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान से वार्ता करेंगे वो शायद ये नहीं जानते कि पिछले 55 सालों में पाकिस्तान से बातचीत करने के सभी प्रयत्न भारत की तरफ से ही आये हैं .

~ अटल बिहारी वाजपेयी

कोई भी दल हो, पूजा का कोई भी स्थान हो, उसको अपनी राजनीतिक गतिविधियां वहां नहीं चलानी चाहिए ।

हिन्दू धर्म के प्रति मेरे आकर्षण का सबसे मुख्य कारण है कि यह मानव का सर्वोत्कृष्ट धर्म है.

जैव – विविधता कन्वेंशन ने विश्व के गरीबों को कोई ठोस लाभ नहीं पहुँचाया है .

हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन का न प्रारंभ है और न अंत ही । यह एक अनंत चक्र है ।

जीवन जीना एक कला है। एक विज्ञान है दोनों का समन्‍वय आवश्यक है। 

कपड़ों की दुधिया सफेदी जैसे मन की मलिनता को नहीं छिपा सकती। 

वास्तविकता ये है कि यू एन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन उतने ही कारगर हो सकते हैं जितना की उनके सदस्य उन्हें होने की अनुमति दें .

ऐसी खुशियां जो हमेशा हमारा साथ दें, कभी नहीं थी, कभी नहीं है और कभी नहीं रहेंगी।

हम उम्मीद करते हैं की विश्व प्रबुद्ध स्वार्थ की भावना से काम करेगा.

इतिहास में हुई भूल के लिए आज किसी से भी बदला लेने का समय नहीं है,

लेकिन उस भूल को ठीक करने का सवाल है।

हमें हिन्दू कहलाने में गर्व महसूस करना चाहिए, बशर्ते कि हम भारतीय होने में भी आत्मगौरव महसूस करें.

मुझे अपने हिन्दूत्व पर अभिमान है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्तिम-विरोधी हूं ।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

टूट सकते हैं मगर झुक नहीं सकते। 

हिन्दू समाज गतिशील है, हिंदू समाज में परिवर्तन हुए हैं, परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है । हिन्दू समाज जड़ समाज नहीं है ।

भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता.

~ अटल बिहारी वाजपेयी

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शहीदों का रक्त अभी गीला है और चिता की रख में चिंगारियां बाकी हैं। उजड़े हुए सुहाग और जंजीरों में जकड़ी हुई जवानियाँ उन उग्त्याचारों की गवाह हैं। 

Famous Quotes of Atal Bihari Vajpayee

मानव और मानव के बिच में जो भेद की दीवारें कड़ी हैं, उनको ढहाना होगा, और इसके लिए एक राष्ट्रिय अभियान की आवश्यकता है। 

उपासना, मत और ईश्वर संबंधी विश्वास की स्वतंत्रता भारतीय संस्कृति की परम्परा रही है ।

देश में कुछ ऐसे पूजा के स्थान हैं, जिनको पिछले हजार-पांच सौ वर्षों में दूसरे मजहब के मानने वालों ने उनके मूल उपासकों से छीनकर अपने अधिकार में कर लिया, चाहे वह कृष्ण जन्मस्थान हो, चाहे राम जन्मस्थान हो, चाहे वह काशी विश्वनाथ का मंदिर हो ।

इतिहास ने, भूगोल ने, परंपरा ने, संस्कृति ने, धर्म ने, नदियों ने हमें आपस में बांधा है।

अस्पृश्यता कानून के विरुद्ध ही नहीं, वह परमात्मा तथा मानवता के विरुद्ध भी एक गंभीर अपराध है।

इंसान बनो, केवल नाम से नहीं, रूप से नहीं, शक्ल से नहीं, हृदय से, बुद्धि से, सरकार से, ज्ञान से ।

अगर भ्रष्टाचार का मतलब यह है कि छोटी-छोटी मछलियों को फांसा जाए और बड़े-बड़े मगरमच्छ जाल में से निकल जाएं तो जनता में विश्वास पैदा नहीं हो सकता। हम अगर देश में राजनीतिक और सामाजिक अनुशासन पैदा करना चाहते हैं तो उसके लिए भ्रष्टाचार का निराकरण आवश्यक है।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

मजहब बदलने से न राष्ट्रीयता बदलती है और न संस्कृति में परिवर्तन होता ।

सभ्यता कलेवर है, संस्कृति उसका अन्तरंग । सभ्यता सूल होती है, संस्कृति सूक्ष्म । सभ्यता समय के साथ बदलती है, किंतु संस्कृति अधिक स्थायी होती है । 

मानव और मानव के बीच में जो भेद की दीवारें खड़ी हैं, उनको ढहाना होगा, और इसके लिए एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है। 

समता के साथ ममता, अधिकार के साथ आत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन आधारस्तम्भ हैं। इन्हीं स्तम्भों पर हमें भावी भारत का भवन खड़ा करना है।

मनुष्य-मनुष्य के संबंध अच्छे रहें, सांप्रदायिक सद्‌भाव रहे, मजहब का शोषण न किया जाए, जाति के आधार पर लोगों की हीन भावना को उत्तेजित न किया जाए, इसमें कोई मतभेद नहीं है ।

भगवान जो कुछ करता है, वह भलाई के लिए ही करता है ।

पाकिस्तान कश्मीर, कश्मीरियों के लिए नहीं चाहता। वह कश्मीर चाहता है पाकिस्तान के लिए। वह कश्मीरियों को बलि का बकरा बनाना चाहता है।

राजनीति काजल की कोठरी है। जो इसमें जाता है, काला होकर ही निकलता है। ऐसी राजनीतिक व्यवस्था में ईमानदार होकर भी सक्रिय रहना, बेदाग छवि बनाए रखना, क्या कठिन नहीं हो गया है?

~ अटल बिहारी वाजपेयी

नर को नारायण का रूप देने वाले भारत ने दरिद्र और लक्ष्मीवान, दोनों में एक ही परम तत्त्व का दर्शन किया है । 

भारत की सुरक्षा की अवधारणा सैनिक शक्ति नहीं है। भारत अनुभव करता है सुरक्षा आन्तरिक शक्ति से आती है। 

~ अटल बिहारी वाजपेयी

भारत की सुरक्षा की अवधारणा सैनिक शक्ति नहीं है। भारत अनुभव करता है सुरक्षा आन्तरिक शक्ति से आती है। 

‘रामचरितमानस’ तो मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है । जीवन की समग्रता का जो वर्णन गोस्वामी तुलसीदास ने किया है, वैसा विश्व-साहित्य में नहीं हुआ है ।

बिना हमको सफाई का मौका दिए फांसी पर चढ़ाने की कोशिश मत करिए, क्योंकि हम मरते-मरते भी लड़ेंगे और लड़ते-लड़ते भी मरने को तैयार हैं।

लोकतंत्र बड़ा नाजुक पौधा है। लोकतंत्र को धीरे- धीरे विकसित करना होगा। केन्द्र को सबको साथ लेकर चलने की भावना से आगे बढ़ना होगा। 

साहित्यकार का हृदय दया, क्षमा, करुणा और प्रेम से आपूरित रहता है । इसलिए वह खून की होली नहीं खेल सकता ।

Atal Bihari Vajpayee Slogan in Hindi

राष्ट्र की सच्ची एकता तब पैदा होगी, जब भारतीय भाषाएं अपना स्थान ग्रहण करेंगी।

मेरे भाषणों में मेरा लेखक ही बोलता है, पर ऐसा नहीं कि राजनेता मौन रहता है । मेरे लेखक और राजनेता का परस्पर समन्वय ही मेरे भाषणों में उतरता है । यह जरूर है कि राजनेता ने लेखक से बहुत कुछ पाया है ।. साहित्यकार को अपने प्रति सच्चा होना चाहिए । उसे समाज के लिए अपने दायित्व का सही अर्थों में निर्वाह करना चाहिए । उसके तर्क प्रामाणिक हो । उसकी दृष्टि रचनात्मक होनी चाहिए । वह समसामयिकता को साथ लेकर चले, पर आने वाले कल की चिंता जरूर करे ।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

हिन्दी को अपनाने का फैसला केवल हिन्दी वालों ने ही नहीं किया। हिन्दी की आवाज पहले अहिन्दी प्रान्तों से उठी। स्वामी दयानन्दजी, महात्मा गांधी या बंगाल के नेता हिन्दीभाषी नहीं थे। हिन्दी हमारी आजादी के आनंदोलन का एक कार्यक्रम बनी।

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राष्ट्रशक्ति को अपमानित करने का मूल्य रावण को अपने दस शीशों के रूप में सव्याज चुकाना पड़ा । असुरों की लंका भारत के पावन चरणों में भक्तिभाव से भरकर कन्दकली की भांति सुशोभित हुई । धर्म की स्थापना हुई, अधर्म का नाश हुआ ।

भारत की जितनी भी भाषाएं हैं, वे हमारी भाषाएं हैं, वे हमारी अपनी हैं, उनमें हमारी आत्मा का प्रतिबिम्ब है, वे हमारी आत्माभिव्यक्ति का साधन हैं। उनमें कोई छोटी-बड़ी नहीं है। 

शिक्षा आज व्यापार बन गई है । ऐसी दशा में उसमें प्राणवत्ता कहां रहेगी? उपनिषदों या अन्य प्राचीन ग्रंथों की उगेर हमारा ध्यान नहीं जाता । आज विद्यालयों में छात्र थोक में आते हैं ।

हिन्दी वालों को चाहिए कि हिन्दी प्रदेशों में हिन्दी को पूरी तरह जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रतिष्ठित करें।

मुझे शिक्षकों का मान-सम्मान करने में गर्व की अनुभूति होती है । अध्यापकों को शासन द्वारा प्रोत्साहन मिलना चाहिए । प्राचीनकाल में अध्यापक का बहत सम्मान था । आज तो अध्यापक पिस रहा है ।

मोटे तौर पर शिक्षा रोजगार या धंधे से जुड़ी होनी चाहिए। वह राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में सहायक हो और व्यक्ति को सुसंस्कारित करे। 

किशोरों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है । आरक्षण के कारण योग्यता व्यर्थ हो गई है । छात्रों का प्रवेश विद्यालयों में नहीं हो पा रहा है । किसी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता । यह मौलिक अधिकार है ।

वर्तमान शिक्षा-पद्धति की विकृतियों से, उसके दोषों से, कमियों से सारा देश परिचित है । मगर नई शिक्षा-नीति कहां है?

निरक्षरता और निर्धनता का बड़ा गहरा संबंध है। 

साहित्यकार का हृदय दया, क्षमा, करुणा और प्रेम से आपूरित रहता है। इसलिए वह खून की होली नहीं खेल सकता। 

हिन्दी का किसी भारतीय भाषा से झगड़ा नहीं है । हिन्दी सभी भारतीय भाषाओं को विकसित देखना चाहती है, लेकिन यह निर्णय संविधान सभा का है कि हिन्दी केन्द्र की भाषा बने ।

मेरे भाषणों में मेरा लेखक ही बोलता है, पर ऐसा नहीं कि राजनेता मौन रहता है। मेरे लेखक और राजनेता का परस्पर समन्वय ही मेरे भाषणों में उतरता है। यह जरूर है कि राजनेता ने लेखक से बहुत कुछ पाया है। साहित्यकार को अपने प्रति सच्चा होना चाहिए। उसे समाज के लिए अपने दायित्व का सही अर्थों में निर्वाह करना चाहिए। उसके तर्क प्रामाणिक हो। उसकी दृष्टि रचनात्मक होनी चाहिए। वह समसामयिकता को साथ लेकर चले, पर आने वाले कल की चिंता जरूर करे। 

~ अटल बिहारी वाजपेयी

जातिवाद का जहर समाज के हर वर्ग में पहुंच रहा है । यह स्थिति सबके लिए चिंताजनक है. हमें सामाजिक समता भी चाहिए और सामाजिक समरसता भी चाहिए ।

वास्तव में हमारे देश की लाठी कमजोर नहीं है, वरन् वह जिन हाथों में है, वे कांप रहे हैं ।

मैं हिन्दू परम्परा में गर्व महसूस करता हूं लेकिन मुझे भारतीय परम्परा में और ज्यादा गर्व है.

समता के साथ ममता, अधिकार के साथ उगत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन स्तंभ हैं।

जीवन के फूल को पूर्ण ताकत से खिलाएं।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

जहां-जहां हमें सत्ता द्वारा सेवा का अवसर मिला है, हमने ईमानदारी, निष्पक्षता तथा सिद्धांतप्रियता का परिचय दिया है ।

Atal Bihari Vajpayee Inspirational Quotes

सेना के उन जवानों का अभिनन्दन होना चाहिए, जिन्होंने अपने रक्त से विजय की गाथा लिखी विजय का सर्वाधिक श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है तो हमारे बहादुर जवानों को और उनके कुशल सेनापतियों को । अभी मुझे ऐसा सैनिक मिलना बाकी है, जिसकी पीठ में गोली का निशान हो । जितने भी गोली के निशान हैं, सब निशान सामने लगे हैं । अगर अपनी सेनाओं या रेजिमेंटों के नाम हमें रखने हैं तो राजपूत रेजिमेंट के स्थान पर राणा प्रताप रेजिमेंट रखें, मराठा रेजिमेंट के स्थान पर शिवाजी रेजिमेंट और ताना रेजिमेंट रखे, सिख रेजिमेंट की जगह रणजीत सिंह रेजिमेंट रखें ।

मन हारकर मैदान नहीं जीते जाते, न मैदान जीतने से मन ही जीते जाते हैं।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी

नेपाल हमारा पड़ोसी देश है । दुनिया के कोई देश इतने निकट नहीं हो सकते जितने भारत और नेपाल हैं । 

पेड़ के ऊपर चढ़ा आदमी, ऊँचा दिखाई देता है। जड़ में खड़ा आदमी, नीचा दिखाई देता है। न आदमी ऊँचा होता है, न नीचा होता है, न बड़ा होता है, न छोटा होता है। आदमी सिर्फ आदमी होता है। 

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता। 

मारुति हनुमानजी की मां का नाम है । पवनसुत के बारे में कहा जाता है कि वे चलते नहीं है,, छलांग लगाते हैं या उड़ते हैं । तो जो गुण पुत्र के बारे में हैं, माता उनसे वंचित नहीं हो सकती । मारुति कार भी जिस तेजी से आगे बढ़ी है, उससे लगता है कि हर मामले में छलांग लगाती है ।

जलना होगा, गलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा.

~ अटल बिहारी वाजपेयी

में जी भर जी लिया, मैं मन से मरू, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरु. ~ अटल बिहारी वाजपेयी

हमने भूख को समाप्त कर दिया, लेकिन अब हमे अकाल को समाप्त करना होगा.

हम सब यहाँ किसी खास वजह है. अपने अतीत के कैदी बनना छोडिये. अपने भविष्य के निर्माता बनिये.

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किसी भी मुल्क को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझदारी का हिस्सा होने का ढोंग नहीं करना चाहिए, जबकि वो आतंकवाद को बढाने, उकसाने, और प्रायोजित करने में लगा हुआ हो.

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